वसीयतनामा
दो गवाहों के सामने हस्ताक्षरित सरल वसीयत: किसे क्या मिलेगा।
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काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
वसीयतनामा
मैं, बलवंत कौर विधवा स्व. श्री जगीर सिंह, आयु लगभग 67 वर्ष, निवासी गाँव कल्याणपुर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब, पूरे होश-हवास और अच्छी सेहत में, अपनी मर्ज़ी से, बिना किसी दबाव के, यह अपनी अंतिम वसीयत लिखती हूँ। मेरे द्वारा पहले की गई सभी वसीयतें व कोडिसिल रद्द करती हूँ।
1.यह कि मेरी मृत्यु के बाद मेरी संपत्ति इस प्रकार जाएगी:
(क)मेरे भतीजे गुरदेव सिंह को: मेरी खेती की ज़मीन, खेवट नं. 77, गाँव कल्याणपुर;
(ख)मेरे भतीजे की बेटी सिमरन कौर को: मेरे सोने के गहने और मेरे बैंक खातों का पैसा;
2.यह कि मेरी बाक़ी सभी चल-अचल संपत्ति, चाहे अभी की हो या बाद में बने, मेरे भतीजे गुरदेव सिंह को जाएगी।
3.यह कि मैंने यह वसीयत पूरी तरह समझकर जान-बूझकर की है, और इसके विरुद्ध किसी और का मेरी संपत्ति पर कोई दावा नहीं होगा।
उपरोक्त वसीयतकर्ता ने हम दोनों की एक साथ उपस्थिति में इस पर अपनी अंतिम वसीयत के रूप में हस्ताक्षर किए, और हमने उसकी उपस्थिति में गवाह के रूप में हस्ताक्षर किए।
दिनांक: 12-10-2026
गवाह:
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- आधार कार्ड या कोई अन्य फ़ोटो पहचान पत्र (फ़ोटोकॉपी; दिखाने के लिए मूल)
- आपकी संपत्ति की सूची, ब्योरे सहित: ज़मीन और मकानों की रजिस्ट्री या जमाबंदी (फ़र्द), और बैंक, जमा और अन्य खाते
- हर उस व्यक्ति का पूरा नाम, रिश्ता और पता जिसे कुछ मिलना है, और निष्पादक का भी
- दो गवाह, जिन्हें (और जिनके पति या पत्नी को) वसीयत में कुछ नहीं मिल रहा, हर एक फ़ोटो पहचान पत्र सहित
- दो ताज़ा पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो, अगर वसीयत की रजिस्ट्री करवानी है
- डॉक्टर का प्रमाण पत्र कि आप स्वस्थ मन के हैं, अगर आप बहुत बुज़ुर्ग या बीमार हैं (उचित है, ज़रूरी नहीं)
कहाँ जाना है
आप दो गवाहों की हाज़िरी में हस्ताक्षर करते हैं, और गवाह आपकी हाज़िरी में हस्ताक्षर करते हैं (धारा 63 भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम)। स्टाम्प पेपर की ज़रूरत नहीं। रजिस्ट्री वैकल्पिक है: करवानी हो तो आप गवाहों के साथ स्वयं सब-रजिस्ट्रार के दफ़्तर जाते हैं।
फ़ीस
वसीयत पर कोई स्टाम्प शुल्क नहीं लगता। रजिस्ट्री करवाएँ तो सब-रजिस्ट्रार की रजिस्ट्री फ़ीस वहीं दी जाती है; आज की राशि पूछें। अर्ज़ीनवीस या वकील की फ़ीस अलग है।
ध्यान दें
- मूल वसीयत संभालकर रखें और निष्पादक या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को बताएँ कि वह कहाँ है; वसीयत को सीलबंद लिफ़ाफ़े में रजिस्ट्रार के पास जमा भी करवाया जा सकता है (धारा 42 रजिस्ट्रेशन एक्ट)।
- आप जीते-जी कभी भी वसीयत बदल या रद्द कर सकते हैं: "कोडिसिल (वसीयत में बदलाव)" देखें, या नई वसीयत बनाएँ जो पुरानी को रद्द करे।
- गवाह आपको हस्ताक्षर करते देखें और आपके सामने हस्ताक्षर करें; किसी गवाह, या गवाह के पति या पत्नी, को दी गई चीज़ शून्य होती है (धारा 67 भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम)।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
वसीयत के लिए स्टाम्प पेपर ज़रूरी नहीं। रजिस्ट्री वैकल्पिक है पर उचित है; दो गवाहों के हस्ताक्षर ज़रूरी हैं।