निशानदेही हेतु प्रार्थना पत्र
राजस्व दफ़्तर से अपनी ज़मीन की हदें तय करवाना।
यह काग़ज़ भरने के लिए तैयार दस्तावो में खुलता है, इस कंप्यूटर पर या ऐप में। खाते की ज़रूरत नहीं।
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अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।
काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
सेवा में,
तहसीलदार / सहायक कलेक्टर,
तहसील अमरनगर
विषय: ज़मीन की निशानदेही बारे
महोदय/महोदया,
1.यह कि प्रार्थी निम्नलिखित ज़मीन का मालिक व क़ाबिज़ है:
खेती की ज़मीन रक़बा 16 कनाल 4 मरला, खेवट नं. 77, खतौनी नं. 102, ख़सरा नं. 45//12 (8-0) व 45//13 (8-4), गाँव कल्याणपुर, हदबस्त नं. 112, तहसील व ज़िला अमरनगर, जमाबंदी साल 2022-23 के अनुसार, सिंचाई के सभी अधिकारों और ट्यूबवेल कनेक्शन सहित।
2.यह कि निशानदेही की ज़रूरत है, क्योंकि पड़ोसी मालिक ने पश्चिमी हद के साथ प्रार्थी की लगभग दो मरला ज़मीन जोत ली है।
3.यह कि पड़ोसी मालिकों, गाँव कल्याणपुर के जगीर सिंह और ओम प्रकाश, को निशानदेही की तारीख़ की सूचना दी जाए।
4.यह कि प्रार्थी निर्धारित फ़ीस देने को तैयार है, और प्रार्थना करता है कि राजस्व कर्मचारी मौक़े पर ज़मीन की निशानदेही कर रिपोर्ट दें।
धन्यवाद सहित,
दिनांक: 12-10-2026
गुरदेव सिंह
मकान नं. 88, मॉडल टाउन, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब
फ़ोन: 0000000005
संलग्न:
जमाबंदी की नक़ल, फ़र्द, अक्स शजरा
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- ज़मीन की ताज़ा जमाबंदी (फ़र्द) की नक़ल, फ़र्द केंद्र या पटवारी से
- ख़सरा नंबरों का अक्स शजरा और, यदि हो, पिछली निशानदेही की रिपोर्ट
- वह इंतक़ाल या रजिस्टर्ड विलेख जिससे ज़मीन आपकी है
- आधार कार्ड या कोई अन्य फ़ोटो पहचान पत्र (फ़ोटोकॉपी; दिखाने के लिए मूल)
- नोटिस के लिए पड़ोसी मालिकों के नाम और पते
कहाँ जाना है
तहसील के तहसीलदार (असिस्टेंट कलेक्टर) के यहाँ, या जहाँ राज्य सुविधा दे वहाँ ऑनलाइन, दाख़िल होता है। तय तारीख़ पर, पड़ोसियों को नोटिस देकर, कानूनगो और पटवारी मौक़े पर हदें लगाते हैं और रिपोर्ट देते हैं।
फ़ीस
आवेदन सादे काग़ज़ पर होता है; राज्य की तय निशानदेही फ़ीस तहसील के कहे अनुसार दी जाती है। आज की राशि वहीं पूछें।
ध्यान दें
- तय तारीख़ पर अपने काग़ज़ों के साथ मौक़े पर रहें; पड़ोसी भी आकर अपनी आपत्तियाँ रख सकते हैं।
- हदों के निशान ख़ुद न हटाएँ। रिपोर्ट से असहमत हों तो राजस्व अधिकारी के सामने आपत्ति करें या ऊपर के अधिकारी के पास अपील करें।
- इंतक़ाल या निशानदेही केवल मौक़े की स्थिति दर्ज करते हैं; ये तय नहीं करते कि ज़मीन का मालिक कौन है, और झगड़ा दीवानी अदालत में जाता है।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
सादा काग़ज़ काफ़ी है।