एनआरआई का ख़ास मुख़्तारनामा (विदेश में निष्पादित)

विदेश में रहने वाले के लिए, जिसे भारत में किसी रिश्तेदार से काम करवाना है। विदेश में नोटरी या दूतावास के सामने हस्ताक्षर और तीन महीने में भारत में स्टाम्प।

दस्तावो में मुफ़्त बनाएँ

यह काग़ज़ भरने के लिए तैयार दस्तावो में खुलता है, इस कंप्यूटर पर या ऐप में। खाते की ज़रूरत नहीं।

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अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।

काग़ज़ की शुरुआत

दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।

ख़ास मुख़्तारनामा

सर्वसाधारण को ज्ञात हो कि मैं, नेहा वर्मा पत्नी श्री अनिल वर्मा, आयु लगभग 28 वर्ष, निवासी मकान नं. 18, मेपल स्ट्रीट, ब्रैम्पटन, ओंटारियो, कनाडा, अनिल वर्मा पुत्र श्री रमेश वर्मा, आयु लगभग 31 वर्ष, निवासी मकान नं. 204, सेक्टर 9, शांतिपुर, ज़िला शांतिपुर, हरियाणा को अपना ख़ास मुख़्तार नियुक्त करती हूँ, जो मेरे नाम से और मेरी ओर से निम्नलिखित कार्य करेगा:-

(पासपोर्ट नं. Z0000001)

1.नीचे वर्णित मेरा रिहायशी प्लॉट बेचना, क़ीमत प्राप्त करना और सब-रजिस्ट्रार के सामने बयनामा हस्ताक्षरित कर रजिस्टर्ड करवाना।

2.उस काम के लिए ज़रूरी हर काग़ज़ पर हस्ताक्षर कर दाख़िल करना और हर दफ़्तर में पेश होना।

संपत्ति: रिहायशी प्लॉट रक़बा 200 वर्ग गज़, ख़सरा नं. 45/2, गाँव कल्याणपुर, हदबस्त नं. 112, तहसील व ज़िला अमरनगर, जिसके उत्तर में 20 फ़ुट सड़क, दक्षिण में जगीर सिंह का प्लॉट, पूर्व में ओम प्रकाश का मकान और पश्चिम में ख़ाली ज़मीन है।

यह मुख़्तारनामा इसके निष्पादन की तारीख़ से 12 महीने तक लागू रहेगा, यदि मैं इसे पहले रद्द न कर दूँ, और उसके बाद समाप्त हो जाएगा।

और मेरा मुख़्तार इस मुख़्तारनामे के अंतर्गत जो भी क़ानूनी रूप से करेगा, उसे मैं ऐसे ही मान्य व पुष्ट करूँगी जैसे मैंने स्वयं किया हो।

यह मुख़्तारनामा भारत से बाहर नोटरी पब्लिक या भारतीय कौंसुलर अधिकारी के सामने निष्पादित किया गया है। भारत में प्राप्त होने के तीन महीने के भीतर इस पर स्टाम्प शुल्क चुकाया जाएगा और तभी से यह प्रभावी होगा।

बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।

साथ क्या लाएँ

साथ लाने वाले काग़ज़

कहाँ जाना है

विदेश में भारतीय कौंसुलर अधिकारी के सामने (अक्सर दूतावास या कौंसुलेट के सेवा केंद्र के ज़रिए), या स्थानीय नोटरी के सामने हस्ताक्षर होते हैं और, जहाँ देश एपोस्टिल संधि मानता है, उस पर एपोस्टिल लगता है। फिर मूल मुख़्तारनामा भारत में मुख़्तार को भेजा जाता है।

फ़ीस

विदेश में कौंसुलेट या नोटरी अपनी फ़ीस लेते हैं। भारत में स्टाम्प शुल्क राज्य की अनुसूची के अनुसार, काग़ज़ आने के बाद, प्रायः कलेक्टर के दफ़्तर में या ई-स्टाम्प से दिया जाता है; आज की राशि सब-रजिस्ट्रार के दफ़्तर से पूछें।

ध्यान दें

काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।

स्टाम्प पेपर

मुख़्तारनामे पर स्टाम्प शुल्क लगता है; अचल संपत्ति बेचने वाले मुख़्तारनामे की अधिकांश राज्यों में रजिस्ट्री ज़रूरी है। मौजूदा नियम जाँचें।