किराया नियंत्रक के समक्ष बेदख़ली याचिका (धारा 13, पंजाब या हरियाणा किराया क़ानून)
पंजाब (व चंडीगढ़) या हरियाणा किराया अधिनियम की धारा 13 के अंतर्गत एक या अधिक आधारों पर किरायेदार की बेदख़ली हेतु मकान मालिक की याचिका।
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काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान किराया नियंत्रक, अमरनगर
किराया याचिका नं. ______ सन् 2026
बनाम
पूर्वी पंजाब शहरी किराया प्रतिबंध अधिनियम, 1949 की धारा 13 के अंतर्गत किरायेदार की बेदख़ली हेतु याचिका
निवेदन है कि:-
1.यह कि याचिकाकर्ता नीचे वर्णित ग़ैर-रिहायशी भवन का मालिक और मकान मालिक है, जिसे आगे "किराये पर दी गई जगह" कहा गया है, जो अमरनगर के शहरी क्षेत्र में स्थित है और जिस पर पूर्वी पंजाब शहरी किराया प्रतिबंध अधिनियम, 1949 लागू होता है:
दुकान नं. 3, मेन बाज़ार, अमरनगर, नाप 10 फ़ुट × 30 फ़ुट, याचिकाकर्ता के भवन की निचली मंज़िल पर, जिसके उत्तर में मेन बाज़ार की सड़क, दक्षिण में आम गली, पूर्व में दुकान नं. 2 और पश्चिम में दुकान नं. 4 है।
2.यह कि प्रत्यर्थी दिनांक 01-11-2023 से ₹18,000 (अठारह हज़ार रुपये मात्र) मासिक किराये (बिजली व पानी के ख़र्च के अलावा) पर याचिकाकर्ता के किरायेदार के रूप में किराये पर दी गई जगह पर क़ाबिज़ है।
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- इमारत के मालिक होने का सबूत: बयनामा, जमाबंदी (फ़र्द) या इंतक़ाल, अलॉटमेंट पत्र, या संपत्ति कर का रिकॉर्ड
- किरायेदारी का सबूत: किरायानामा या इक़रारनामा, किराये की रसीदें या दिए गए किराये का बैंक रिकॉर्ड
- हर आधार का सबूत: बकाया किराये का हिसाब और भेजा गया नोटिस; अपनी ज़रूरत के लिए, किसे चाहिए और आप अभी कहाँ रहते हैं; असुरक्षित इमारत के लिए, नगर निकाय का नोटिस या इंजीनियर की रिपोर्ट
- किरायेदार का पूरा नाम, पिता या पति का नाम और पता, और जगह का नक़्शा अगर आपके पास हो
- आपका पहचान पत्र, और आपके वकील के नाम आपके हस्ताक्षर वाला वकालतनामा
कहाँ जाना है
जिस शहरी क्षेत्र में इमारत है, वहाँ के किराया नियंत्रक के सामने वकील के माध्यम से, समर्थन वाले शपथ पत्र सहित, दाख़िल होती है (प्रायः कोई सिविल जज किराया नियंत्रक का काम करते हैं)।
फ़ीस
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगते हैं; आज की राशि काउंटर पर पूछें। वकील की फ़ीस अलग है।
ध्यान दें
- बकाया किराये के आधार पर, किरायेदार पहली सुनवाई की तारीख़ पर बकाया, ब्याज और ख़र्च देकर अब भी बेदख़ली से बच सकता है, जैसा अधिनियम कहता है।
- किरायेदार पर दबाव डालने के लिए कभी ताला न लगाएँ, सामान न हटाएँ, पानी या बिजली न काटें: यह ग़ैरक़ानूनी है।
- पंजाब में एनआरआई मकान-मालिक के लिए अधिनियम की धारा 13-बी के तहत जल्दी का रास्ता हो सकता है; अपने वकील से पूछें।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
वादपत्र, याचिका या अपील पर कोर्ट फ़ीस राहत और उसकी मालियत के अनुसार राज्य के कोर्ट फ़ीस क़ानून से तय होती है; कोर्ट फ़ीस टिकट (या ई-कोर्ट फ़ीस की रसीद) और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।