स्थायी निषेधाज्ञा का दावा (धारा 38 विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम)
संपत्ति या क़ब्ज़े में दख़ल रोकने के लिए वादपत्र, वैकल्पिक अनिवार्य निषेधाज्ञा सहित।
यह काग़ज़ भरने के लिए तैयार दस्तावो में खुलता है, इस कंप्यूटर पर या ऐप में। खाते की ज़रूरत नहीं।
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काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान सिविल जज (जूनियर डिवीज़न), अमरनगर
दीवानी दावा नं. ______ सन् 2026
बनाम
स्थायी निषेधाज्ञा एवं अनिवार्य निषेधाज्ञा का दावा
(प्रतिवादी को वादी के विवादित संपत्ति पर शांतिपूर्ण क़ब्ज़े में दख़ल देने, वादी को उससे ज़बरदस्ती बेदख़ल करने और उसके किसी भी हिस्से पर कोई निर्माण करने से रोकने और विवादित संपत्ति की पश्चिमी हद पर उसके द्वारा खोदी गई खाई भरने का निर्देश देने हेतु)
निवेदन है कि:-
1.यह कि वादी निम्नलिखित संपत्ति का मालिक व क़ाबिज़ है, जिसे आगे "विवादित संपत्ति" कहा गया है:
रिहायशी प्लॉट रक़बा 200 वर्ग गज़, ख़सरा नं. 45/2, गाँव कल्याणपुर, हदबस्त नं. 112, तहसील व ज़िला अमरनगर, जिसके उत्तर में 20 फ़ुट सड़क, दक्षिण में जगीर सिंह का प्लॉट, पूर्व में ओम प्रकाश का मकान और पश्चिम में प्रतिवादी का प्लॉट है।
2.यह कि वादी ने विवादित संपत्ति जगीर सिंह से रजिस्टर्ड बयनामा नं. 1234 दिनांक 12-05-2010 द्वारा ख़रीदी, उसके नाम इंतक़ाल मंज़ूर हुआ, और तब से वह उस पर शांतिपूर्वक क़ाबिज़ है।
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- मालिकाना हक़ या क़ब्ज़े का सबूत: बयनामा या विरासत के काग़ज़, जमाबंदी (फ़र्द), इंतक़ाल और ख़सरा गिरदावरी, या किरायानामा; मकान के लिए संपत्ति कर और बिजली के बिल
- विवादित हिस्सा दिखाने वाला नक़्शा, और प्रतिवादी ने जो किया उसकी तारीख़ वाली फ़ोटो
- पुलिस शिकायतों या डीडीआर की प्रतियाँ, और संपत्ति के बारे में पहले के आदेशों या मुक़दमों की प्रतियाँ
- हर प्रतिवादी का पूरा नाम, पिता या पति का नाम और मौजूदा पता, सम्मन के लिए
- आपका पहचान पत्र, और आपके वकील के नाम आपके हस्ताक्षर वाला वकालतनामा
कहाँ जाना है
जिस क्षेत्र में संपत्ति है, वहाँ के सिविल जज के फ़ाइलिंग काउंटर पर वकील के माध्यम से, समर्थन वाले शपथ पत्र सहित, दाख़िल होता है; फिर अदालत प्रतिवादी को सम्मन भेजती है।
फ़ीस
राज्य के कोर्ट फ़ीस क़ानून के अनुसार दावे की मालियत पर कोर्ट फ़ीस, टिकटों या ई-कोर्ट फ़ीस रसीद के रूप में, जैसा काउंटर तय करे, और सम्मन का तलबाना। वकील की फ़ीस अलग है।
ध्यान दें
- प्रतिवादी को तुरंत रोकने के लिए वादपत्र के साथ अस्थायी निषेधाज्ञा का प्रार्थना पत्र दें: "अस्थायी निषेधाज्ञा हेतु प्रार्थना पत्र (आदेश 39 नियम 1-2)" देखें।
- सरकार या किसी सरकारी अधिकारी पर उसके सरकारी काम के लिए दावा करने से पहले दो महीने का नोटिस ज़रूरी है: "सरकार को नोटिस (धारा 80 सीपीसी)" देखें।
- सत्यापन और शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने से पहले पूरा काग़ज़ पढ़ें, या अपनी भाषा में पढ़कर सुनवाएँ: आप शपथ लेते हैं कि यह सच है।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
वादपत्र, याचिका या अपील पर कोर्ट फ़ीस राहत और उसकी मालियत के अनुसार राज्य के कोर्ट फ़ीस क़ानून से तय होती है; कोर्ट फ़ीस टिकट (या ई-कोर्ट फ़ीस की रसीद) और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।