प्रथम अपील का ज्ञापन (धारा 96 व आदेश 41 सीपीसी)
दीवानी डिक्री के विरुद्ध प्रथम अपील: डिक्री, आधार, मियाद, कोर्ट फ़ीस और माँगी गई राहत।
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काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान ज़िला न्यायाधीश, अमरनगर
सिविल अपील नं. ______ सन् 2026
बनाम
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 96 सपठित आदेश 41 के अंतर्गत प्रथम अपील का ज्ञापन
(विद्वान सिविल जज (जूनियर डिवीज़न), अमरनगर द्वारा दीवानी दावा नं. 512 सन् 2026, विक्रम सिंह बनाम कबीर शर्मा में पारित दिनांक 30-09-2026 के निर्णय व डिक्री के विरुद्ध)
निवेदन है कि:-
1.यह कि प्रत्यर्थी ने अपीलकर्ता के विरुद्ध विद्वान सिविल जज (जूनियर डिवीज़न), अमरनगर के न्यायालय में दीवानी दावा नं. 512 सन् 2026, विक्रम सिंह बनाम कबीर शर्मा दाख़िल किया था, जिसमें उस न्यायालय ने दिनांक 30-09-2026 के निर्णय व डिक्री द्वारा ख़सरा नं. 45/2 की पश्चिमी हद के साथ की ज़मीन की पट्टी के बारे में प्रत्यर्थी का स्थायी निषेधाज्ञा का दावा डिक्री कर दिया।
2.यह कि उक्त निर्णय व डिक्री से व्यथित होकर अपीलकर्ता द्वारा अन्य आधारों के साथ निम्नलिखित आधारों पर यह प्रथम अपील दाख़िल की जा रही है।
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- जिस फ़ैसले और डिक्री के ख़िलाफ़ अपील है, उनकी प्रमाणित प्रतियाँ (नक़ल शाखा में तुरंत अर्ज़ी दें)
- निचली अदालत के वादपत्र, लिखित कथन, गवाही और दस्तावेज़ों की प्रतियाँ, अगर आपके पास हों
- देर से अपील के लिए विलंब माफ़ी का प्रार्थना पत्र, उसके शपथ पत्र और कारणों के सबूत सहित
- आपका पहचान पत्र, और आपके वकील के नाम आपके हस्ताक्षर वाला वकालतनामा
कहाँ जाना है
वकील के माध्यम से उस अदालत में दाख़िल होती है जो उस अदालत की अपीलें सुनती है: प्रायः ज़िला न्यायाधीश, या मालियत ज़िला अदालत की सीमा से ज़्यादा हो तो उच्च न्यायालय।
फ़ीस
अपील की मालियत पर राज्य के कोर्ट फ़ीस क़ानून के अनुसार कोर्ट फ़ीस, वादपत्र की तरह, जैसा काउंटर तय करे। वकील की फ़ीस अलग है।
ध्यान दें
- ज़िला अदालत में डिक्री के 30 दिन के भीतर, या उच्च न्यायालय में 90 दिन के भीतर अपील करें, प्रमाणित प्रति में लगा समय छोड़कर।
- अपील अपने-आप डिक्री को नहीं रोकती: "अपील लंबित रहते डिक्री के निष्पादन पर रोक (आदेश 41 नियम 5 सीपीसी)" देखें; रुपयों की डिक्री में अदालत रक़म जमा कराने या ज़मानत माँग सकती है।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
वादपत्र, याचिका या अपील पर कोर्ट फ़ीस राहत और उसकी मालियत के अनुसार राज्य के कोर्ट फ़ीस क़ानून से तय होती है; कोर्ट फ़ीस टिकट (या ई-कोर्ट फ़ीस की रसीद) और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।