संयुक्त समझौता बयान

दोनों पक्षों का न्यायालय में समझौता (आदेश 23 नियम 3)।

दस्तावो में मुफ़्त बनाएँ

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काग़ज़ की शुरुआत

दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।

न्यायालय श्रीमान सिविल जज (जूनियर डिवीज़न), अमरनगर

दीवानी दावा नं. 412 सन् 2025

विक्रम सिंह पुत्र श्री हरबंस सिंह, आयु लगभग 52 वर्ष, निवासी मकान नं. 45, गुलाब कॉलोनी, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब
…वादी

बनाम

कबीर शर्मा पुत्र श्री देव शर्मा, आयु लगभग 44 वर्ष, निवासी मकान नं. 7, बसंत विहार, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब
…प्रतिवादी

संयुक्त समझौता बयान

दोनों पक्ष संयुक्त रूप से निम्नलिखित बयान करते हैं:-

1.यह कि दोनों पक्षों ने उपरोक्त मुक़दमे के सभी विवाद बिना किसी दबाव के आपसी सहमति से निम्नलिखित शर्तों पर निपटा लिए हैं:

(क)प्रतिवादी 31-12-2026 तक परिसर ख़ाली कर देगा;

(ख)वादी बकाया किराये का दावा छोड़ता है;

2.यह कि दोनों पक्ष इन शर्तों का पालन करेंगे और दीवानी प्रक्रिया संहिता के आदेश 23 नियम 3 के अंतर्गत मुक़दमे का निर्णय इस समझौते के अनुसार किया जाए।

3.यह कि दोनों पक्ष अपना-अपना ख़र्च स्वयं उठाएँगे।

स्थान: अमरनगर
दिनांक: 12-10-2026
विक्रम सिंह (वादी)

कबीर शर्मा
(प्रतिवादी)

साथ क्या लाएँ

साथ लाने वाले काग़ज़

कहाँ जाना है

दोनों पक्ष इस पर हस्ताक्षर करते हैं और प्रायः अपने बयान देने के लिए अदालत (या लोक अदालत या मध्यस्थता केंद्र) में हाज़िर होते हैं; अदालत समझौता दर्ज करके मुक़दमे का फ़ैसला उसी के अनुसार करती है।

फ़ीस

समझौते पर प्रायः कोर्ट फ़ीस नहीं लगती; अगर मुक़दमा लोक अदालत में या मध्यस्थता से निपटे, तो पूछें कि दी गई कोर्ट फ़ीस वापस मिल सकती है या नहीं।

ध्यान दें

काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।

स्टाम्प पेपर

जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।