संयुक्त समझौता बयान
दोनों पक्षों का न्यायालय में समझौता (आदेश 23 नियम 3)।
यह काग़ज़ भरने के लिए तैयार दस्तावो में खुलता है, इस कंप्यूटर पर या ऐप में। खाते की ज़रूरत नहीं।
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अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।
काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान सिविल जज (जूनियर डिवीज़न), अमरनगर
दीवानी दावा नं. 412 सन् 2025
बनाम
संयुक्त समझौता बयान
दोनों पक्ष संयुक्त रूप से निम्नलिखित बयान करते हैं:-
1.यह कि दोनों पक्षों ने उपरोक्त मुक़दमे के सभी विवाद बिना किसी दबाव के आपसी सहमति से निम्नलिखित शर्तों पर निपटा लिए हैं:
(क)प्रतिवादी 31-12-2026 तक परिसर ख़ाली कर देगा;
(ख)वादी बकाया किराये का दावा छोड़ता है;
2.यह कि दोनों पक्ष इन शर्तों का पालन करेंगे और दीवानी प्रक्रिया संहिता के आदेश 23 नियम 3 के अंतर्गत मुक़दमे का निर्णय इस समझौते के अनुसार किया जाए।
3.यह कि दोनों पक्ष अपना-अपना ख़र्च स्वयं उठाएँगे।
दिनांक: 12-10-2026
कबीर शर्मा
(प्रतिवादी)
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- हस्ताक्षर करने वाले हर पक्ष का पहचान पत्र (फ़ोटोकॉपी; दिखाने के लिए मूल)
- तय हुई शर्तें, लिखित में, रक़म, तारीख़ों और हर भुगतान के तरीक़े सहित
- समझौते के तहत दिए जाने वाले चेक या ड्राफ़्ट, और ज़मीन या मकान शामिल हो तो संपत्ति का ब्योरा
- मुख्य मुक़दमा: उसका नंबर और साल, अदालत, पक्षों के नाम और अगली तारीख़
कहाँ जाना है
दोनों पक्ष इस पर हस्ताक्षर करते हैं और प्रायः अपने बयान देने के लिए अदालत (या लोक अदालत या मध्यस्थता केंद्र) में हाज़िर होते हैं; अदालत समझौता दर्ज करके मुक़दमे का फ़ैसला उसी के अनुसार करती है।
फ़ीस
समझौते पर प्रायः कोर्ट फ़ीस नहीं लगती; अगर मुक़दमा लोक अदालत में या मध्यस्थता से निपटे, तो पूछें कि दी गई कोर्ट फ़ीस वापस मिल सकती है या नहीं।
ध्यान दें
- हस्ताक्षर से पहले हर शर्त पढ़ें: समझौते की डिक्री किसी भी डिक्री की तरह बाँधती है और उसे पलटना कठिन है।
- लिखें कि कोई पक्ष समय पर भुगतान या काम न करे तो क्या होगा; जो समझौता इस मुक़दमे से बाहर की ज़मीन भी शामिल करे, उसके लिए रजिस्टर्ड विलेख चाहिए हो सकता है, इसलिए वकील से पूछें।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।