लिखित कथन पर प्रत्युत्तर (रिप्लीकेशन)
लिखित कथन के नए तथ्यों व आपत्तियों पर वादी का जवाब, वादपत्र को दोहराते हुए।
यह काग़ज़ भरने के लिए तैयार दस्तावो में खुलता है, इस कंप्यूटर पर या ऐप में। खाते की ज़रूरत नहीं।
आईफ़ोन और आईपैड: जल्द ही ऐप स्टोर पर · एंड्रॉइड: जल्द ही गूगल प्ले पर
अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।
काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान सिविल जज (जूनियर डिवीज़न), अमरनगर
दीवानी दावा नं. 512 सन् 2026
बनाम
प्रतिवादी के लिखित कथन पर वादी की ओर से प्रत्युत्तर (रिप्लीकेशन)
निवेदन है कि:-
1.यह कि यह प्रत्युत्तर दिनांक 02-11-2026 को दी गई न्यायालय की अनुमति से दाख़िल है।
2.यह कि वादी ने प्रतिवादी द्वारा दिनांक 02-11-2026 को दाख़िल लिखित कथन पढ़ लिया है; नीचे स्पष्ट रूप से स्वीकार की गई बातों को छोड़कर उसकी सभी बातें ग़लत हैं और उनसे इनकार किया जाता है, तथा वादपत्र की बातें सत्य होने के रूप में दोहराई जाती हैं।
3.यह कि लिखित कथन में उठाई गई सभी प्रारंभिक आपत्तियाँ ग़लत हैं और उनसे इनकार किया जाता है। दावा अपने वर्तमान रूप में चलने योग्य है; वादी के पास वाद-कारण और दावा करने का अधिकार है; दावा मियाद के भीतर है, उसकी मालियत सही है और वह इस न्यायालय के क्षेत्राधिकार में है; और कोई महत्वपूर्ण तथ्य छिपाया नहीं गया है।
4.यह कि लिखित कथन में प्रारंभिक आपत्ति 5 ग़लत है और उससे इनकार किया जाता है, तथा वादपत्र की संबंधित बातें दोहराई जाती हैं। विवादित संपत्ति का विवरण उसके ख़सरा नंबर और हदों सहित ठीक वैसा ही है जैसा मौक़े पर है, जैसा कि वादपत्र के साथ दाख़िल नक़्शे से दिखता है।
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- आपको मिली लिखित कथन की प्रति
- उसमें उठाए गए नए तथ्यों का जवाब देने वाले काग़ज़
- रिप्लीकेशन की अनुमति देने वाला आदेश, या उसके लिए तय तारीख़
कहाँ जाना है
आपके वकील के माध्यम से उसी अदालत में, दावे के नंबर के साथ, अदालत की अनुमति से, प्रायः अदालत की तय तारीख़ पर दाख़िल होता है; एक प्रति प्रतिवादी को जाती है।
फ़ीस
रिप्लीकेशन पर प्रायः कोर्ट फ़ीस नहीं लगती; काउंटर पर पूछें। वकील की फ़ीस अलग है।
ध्यान दें
- केवल लिखित कथन के नए तथ्यों का जवाब दें: रिप्लीकेशन में नया दावा नहीं उठाया जा सकता।
- सत्यापन और शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने से पहले पूरा काग़ज़ पढ़ें, या अपनी भाषा में पढ़कर सुनवाएँ: आप शपथ लेते हैं कि यह सच है।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
वादपत्र, याचिका या अपील पर कोर्ट फ़ीस राहत और उसकी मालियत के अनुसार राज्य के कोर्ट फ़ीस क़ानून से तय होती है; कोर्ट फ़ीस टिकट (या ई-कोर्ट फ़ीस की रसीद) और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।