साक्ष्य का शपथ पत्र (मुख्य परीक्षा)
गवाह का साक्ष्य शपथ पत्र के रूप में (आदेश 18 नियम 4)।
यह काग़ज़ भरने के लिए तैयार दस्तावो में खुलता है, इस कंप्यूटर पर या ऐप में। खाते की ज़रूरत नहीं।
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अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।
काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान सिविल जज (जूनियर डिवीज़न), अमरनगर
दीवानी दावा नं. 412 सन् 2025
बनाम
पी.डब्ल्यू.-1 का साक्ष्य रूप में शपथ पत्र
मैं, विक्रम सिंह पुत्र श्री हरबंस सिंह, आयु लगभग 52 वर्ष, निवासी मकान नं. 45, गुलाब कॉलोनी, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब, शपथपूर्वक निम्नलिखित बयान करता हूँ:-
1.यह कि मैं वादी हूँ और मकान नं. 45, गुलाब कॉलोनी, अमरनगर का मालिक हूँ।
2.यह कि प्रतिवादी ने जनवरी 2025 से किराया नहीं दिया है।
3.यह कि मैं निम्नलिखित दस्तावेज़ साक्ष्य में पेश करता हूँ:
(क)किरायानामा दिनांक 01-11-2023 — Ex. PW1/1;
4.यह कि यह शपथ पत्र दीवानी प्रक्रिया संहिता के आदेश 18 नियम 4 के अंतर्गत मेरी मुख्य परीक्षा है।
शपथकर्ता
सत्यापन: सत्यापित किया जाता है कि उपरोक्त शपथ पत्र के पैरा 1 से 4 तक की बातें मेरी जानकारी व विश्वास के अनुसार सत्य एवं सही हैं और इसमें कोई बात छिपाई नहीं गई है। आज दिनांक 12 अक्टूबर 2026 को अमरनगर में सत्यापित किया।
शपथकर्ता
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- आधार कार्ड या कोई अन्य फ़ोटो पहचान पत्र (फ़ोटोकॉपी; दिखाने के लिए मूल)
- हर उस दस्तावेज़ का मूल जिसे प्रदर्शित करना है, और हर एक की एक फ़ोटोकॉपी अदालत के लिए और एक दूसरे पक्ष के लिए
- गवाह का पूरा नाम, पिता या पति का नाम, उम्र, पेशा और पता, और साबित किए जाने वाले तथ्य, तारीख़ों के क्रम में
- मुख्य मुक़दमा: उसका नंबर और साल, अदालत, पक्षों के नाम और अगली तारीख़
कहाँ जाना है
गवाह कचहरी में ओथ कमिश्नर के सामने इसकी तस्दीक़ करता है; आपके वकील इसे मुक़दमे में दाख़िल करते हैं और प्रतियाँ दूसरे पक्ष को देते हैं, फिर गवाह अदालत में हाज़िर होकर इसकी पुष्टि करता है।
फ़ीस
केवल अदालत में दाख़िल करने के लिए बना शपथ पत्र प्रायः स्टाम्प शुल्क से मुक्त होता है, और कोर्ट फ़ीस तभी लगती है जब कोर्ट फ़ीस काउंटर कहे; ओथ कमिश्नर की फ़ीस काउंटर पर दी जाती है। आज की राशि वहीं पूछें।
ध्यान दें
- गवाह को तय तारीख़ पर हाज़िर होकर शपथ पत्र पेश करना और जिरह का सामना करना होता है; इसके बिना यह सबूत नहीं बनता।
- केवल वही लिखें जो गवाह ने देखा, सुना या जानता है; दस्तावेज़ प्रायः मूल से साबित होता है, और प्रति के लिए अदालत की अनुमति चाहिए।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
पंजाब: शपथ पत्र प्रायः ई-स्टाम्प पेपर पर लिखा जाता है (अधिकृत ई-स्टाम्प केंद्र से लें, वहीं मौजूदा शुल्क पूछें) और ओथ कमिश्नर या नोटरी के सामने तस्दीक़ होता है। कई सरकारी सेवाओं में अब स्व-घोषणा भी मान्य है।
हरियाणा: ई-स्टाम्प पेपर का प्रयोग करें (अधिकृत विक्रेता; मौजूदा शुल्क जाँचें) और ओथ कमिश्नर या नोटरी के सामने तस्दीक़ करवाएँ।
चंडीगढ़: अधिकृत केंद्र से ई-स्टाम्प पेपर (मौजूदा शुल्क जाँचें); ओथ कमिश्नर या नोटरी के सामने तस्दीक़।