रुपयों की वसूली का दावा (साधारण, या आदेश 37 के अंतर्गत संक्षिप्त)

उधार या बकाया रुपयों के लिए वादपत्र, हिसाब, दावे तक के ब्याज और आगे के ब्याज सहित; साधारण, या आदेश 37 के अंतर्गत संक्षिप्त।

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काग़ज़ की शुरुआत

दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।

न्यायालय श्रीमान सिविल जज (जूनियर डिवीज़न), अमरनगर

दीवानी दावा नं. ______ सन् 2026

विक्रम सिंह पुत्र श्री हरबंस सिंह, आयु लगभग 52 वर्ष, निवासी मकान नं. 45, गुलाब कॉलोनी, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब
…वादी

बनाम

अनिल वर्मा पुत्र श्री रमेश वर्मा, आयु लगभग 31 वर्ष, निवासी मकान नं. 204, सेक्टर 9, शांतिपुर, ज़िला शांतिपुर, हरियाणा
…प्रतिवादी

₹3,27,581 की वसूली का दावा

(मूलधन ₹2,70,000 व ब्याज ₹57,581, साथ में दौराने-मुक़दमा व आइंदा ब्याज और ख़र्चा)

निवेदन है कि:-

1.यह कि प्रतिवादी वादी का जानकार है; दिनांक 10-01-2025 को उसने अपने कारोबार के लिए अमरनगर में वादी से अमर बैंक, अमरनगर के चेक नं. 000111 द्वारा ₹3,00,000 उधार लिए, और उसी दिन वादी के हक़ में प्रोनोट व रसीद लिखकर दी, जिसमें एक वर्ष के भीतर 12% वार्षिक ब्याज सहित रक़म लौटाने का वादा किया।

2.यह कि पक्षों के बीच रुपयों का हिसाब इस प्रकार है:

तारीख़विवरणदिया या बकायावापस मिला
10-01-2025चेक नं. 000111 द्वारा उधार₹3,00,000—
15-07-2025प्रतिवादी द्वारा नक़द आंशिक भुगतान—₹30,000

3.यह कि प्रतिवादी की ओर वादी का ₹2,70,000 (दो लाख सत्तर हज़ार रुपये मात्र) मूलधन अब बकाया है।

4.यह कि प्रतिवादी ने 12% वार्षिक की दर से ब्याज देना स्वीकार किया था। बकाया राशि पर इस दर से दिनांक 10-01-2025 से 30-09-2026 तक का ब्याज ₹57,581 (सत्तावन हज़ार पाँच सौ इक्यासी रुपये मात्र) बनता है।

बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।

साथ क्या लाएँ

साथ लाने वाले काग़ज़

कहाँ जाना है

जहाँ प्रतिवादी रहता या काम करता है, या जहाँ वाद का कारण बना, वहाँ की दीवानी अदालत में वकील के माध्यम से, समर्थन वाले शपथ पत्र सहित, दाख़िल होता है; संक्षिप्त दावा केवल उसी अदालत में जहाँ आदेश 37 लागू है।

फ़ीस

दावे की रक़म पर राज्य के कोर्ट फ़ीस क़ानून की दरों से कोर्ट फ़ीस, जैसा काउंटर तय करे, और सम्मन का तलबाना। वकील की फ़ीस अलग है।

ध्यान दें

काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।

स्टाम्प पेपर

वादपत्र, याचिका या अपील पर कोर्ट फ़ीस राहत और उसकी मालियत के अनुसार राज्य के कोर्ट फ़ीस क़ानून से तय होती है; कोर्ट फ़ीस टिकट (या ई-कोर्ट फ़ीस की रसीद) और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।