लिखित कथन / जवाबदावा (आदेश 8 सीपीसी)

वादपत्र का प्रतिवादी का जवाब: प्रारंभिक आपत्तियाँ, पैरावार जवाब, अतिरिक्त अभिवचन और सत्यापन।

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अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।

काग़ज़ की शुरुआत

दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।

न्यायालय श्रीमान सिविल जज (जूनियर डिवीज़न), अमरनगर

दीवानी दावा नं. 512 सन् 2026

विक्रम सिंह पुत्र श्री हरबंस सिंह, आयु लगभग 52 वर्ष, निवासी मकान नं. 45, गुलाब कॉलोनी, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब
…वादी

बनाम

कबीर शर्मा पुत्र श्री देव शर्मा, आयु लगभग 44 वर्ष, निवासी मकान नं. 7, बसंत विहार, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब
…प्रतिवादी

प्रतिवादी की ओर से लिखित कथन (जवाबदावा)

(सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश 8 के अंतर्गत)

निवेदन है कि:-

प्रारंभिक आपत्तियाँ

1.यह कि दावा अपने वर्तमान रूप में चलने योग्य नहीं है।

2.यह कि वादपत्र में उत्तरदाता प्रतिवादी के विरुद्ध कोई वाद-कारण नहीं बताया गया है।

3.यह कि कोर्ट फ़ीस व क्षेत्राधिकार के प्रयोजन हेतु दावे की मालियत सही नहीं रखी गई है, और अदा की गई कोर्ट फ़ीस कम है।

4.यह कि वादी साफ़ हाथों से न्यायालय में नहीं आया है और उसने महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए हैं।

5.यह कि विवादित संपत्ति का विवरण सही नहीं है, और वादपत्र में दी गई हदें मौक़े से मेल नहीं खातीं।

गुण-दोष पर जवाब

6.यह कि वादपत्र का पैरा 1 केवल उतना ही स्वीकार है जितना यहाँ लिखा है, बाक़ी से इनकार है। यह स्वीकार है कि वादी ख़सरा नं. 45/2 में एक प्लॉट का मालिक है, परंतु इससे इनकार है कि उसकी पश्चिमी हद के साथ की ज़मीन की पट्टी उसका हिस्सा है; वह पट्टी उत्तरदाता प्रतिवादी के प्लॉट का हिस्सा है।

बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।

साथ क्या लाएँ

साथ लाने वाले काग़ज़

कहाँ जाना है

जिस अदालत ने सम्मन भेजा, उसी में आपके वकील के माध्यम से, दावे के नंबर के साथ, समर्थन वाले शपथ पत्र और आपके दस्तावेज़ों की सूची सहित दाख़िल होता है; एक प्रति वादी को जाती है।

फ़ीस

लिखित कथन पर प्रायः बहुत कम या कोई कोर्ट फ़ीस नहीं लगती; प्रतिदावे (काउंटर-क्लेम) या मुजराई पर अपनी अलग कोर्ट फ़ीस लगती है। काउंटर पर पूछें; वकील की फ़ीस अलग है।

ध्यान दें

काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।

स्टाम्प पेपर

वादपत्र, याचिका या अपील पर कोर्ट फ़ीस राहत और उसकी मालियत के अनुसार राज्य के कोर्ट फ़ीस क़ानून से तय होती है; कोर्ट फ़ीस टिकट (या ई-कोर्ट फ़ीस की रसीद) और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।