ज़मानती का शपथ पत्र व ज़मानतनामा
ज़मानत मिलने पर अभियुक्त के ज़मानती का शपथ पत्र व बंधपत्र।
यह काग़ज़ भरने के लिए तैयार दस्तावो में खुलता है, इस कंप्यूटर पर या ऐप में। खाते की ज़रूरत नहीं।
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अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।
काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, अमरनगर
एफ़आईआर नं. 101 सन् 2026
बनाम
ज़मानती शपथ पत्र व बंधपत्र
मैं, विक्रम सिंह पुत्र श्री हरबंस सिंह, आयु लगभग 52 वर्ष, निवासी मकान नं. 45, गुलाब कॉलोनी, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब, शपथपूर्वक निम्नलिखित बयान करता हूँ:-
1.यह कि मैं उपरोक्त मुक़दमे में अभियुक्त रोहन कुमार का ₹50,000 (पचास हज़ार रुपये मात्र) की राशि में ज़मानती बनता हूँ।
2.यह कि मैं मकान नं. 45, गुलाब कॉलोनी, अमरनगर का मालिक हूँ, जो सभी भारों से मुक्त है और ज़मानत राशि से अधिक मूल्य की है, और ज़मानत रहने तक मैं इसे न बेचूँगा, न गिरवी रखूँगा।
3.यह कि मैं किसी अन्य लंबित मामले में किसी अभियुक्त का ज़मानती नहीं हूँ।
4.यह कि मैं वचन देता हूँ कि जब भी ज़रूरत हो अभियुक्त को न्यायालय में पेश करूँगा, अन्यथा ज़मानत राशि राज्य के पक्ष में ज़ब्त की जा सकती है।
शपथकर्ता
सत्यापन: सत्यापित किया जाता है कि उपरोक्त शपथ पत्र के पैरा 1 से 4 तक की बातें मेरी जानकारी व विश्वास के अनुसार सत्य एवं सही हैं और इसमें कोई बात छिपाई नहीं गई है। आज दिनांक 12 अक्टूबर 2026 को अमरनगर में सत्यापित किया।
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- ज़मानती का आधार कार्ड या कोई अन्य फ़ोटो पहचान पत्र, मौजूदा पते के सबूत सहित (फ़ोटोकॉपी; दिखाने के लिए मूल)
- पेश की गई संपत्ति का सबूत: ज़मीन की ताज़ा जमाबंदी (फ़र्द), मकान का रजिस्टर्ड विलेख, या वाहन की आरसी, जैसा अदालत माने
- ज़मानती की दो ताज़ा पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो
- ज़मानत आदेश की प्रति, और आरोपी का पूरा नाम और मुक़दमे का ब्योरा
कहाँ जाना है
शपथ पत्र कचहरी में ओथ कमिश्नर के सामने तस्दीक़ होता है; फिर ज़मानती अदालत (या उसके बताए ड्यूटी मजिस्ट्रेट) के सामने हाज़िर होता है, जो ज़मानती और संपत्ति की जाँच करती है, कभी पटवारी या पुलिस के ज़रिए, और ज़मानतनामा स्वीकार करती है।
फ़ीस
ज़मानतनामा और निजी मुचलका प्रायः अदालत के छपे फ़ॉर्म पर दिए जाते हैं; कोई स्टाम्प या फ़ीस लगेगी या नहीं, यह अदालत के दफ़्तर या अपने वकील से पूछें।
ध्यान दें
- ज़मानती को पक्का करना होता है कि आरोपी हाज़िर हो: नहीं तो ज़मानत की रक़म ज़ब्त होकर ज़मानती से, पेश की गई संपत्ति से भी, वसूली जा सकती है।
- ज़मानतनामा लागू रहते संपत्ति न बेचें, न गिरवी रखें; ज़मानती बाद में अदालत से ज़मानत से मुक्त करने की अर्ज़ी दे सकता है।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
पंजाब: शपथ पत्र प्रायः ई-स्टाम्प पेपर पर लिखा जाता है (अधिकृत ई-स्टाम्प केंद्र से लें, वहीं मौजूदा शुल्क पूछें) और ओथ कमिश्नर या नोटरी के सामने तस्दीक़ होता है। कई सरकारी सेवाओं में अब स्व-घोषणा भी मान्य है।
हरियाणा: ई-स्टाम्प पेपर का प्रयोग करें (अधिकृत विक्रेता; मौजूदा शुल्क जाँचें) और ओथ कमिश्नर या नोटरी के सामने तस्दीक़ करवाएँ।
चंडीगढ़: अधिकृत केंद्र से ई-स्टाम्प पेपर (मौजूदा शुल्क जाँचें); ओथ कमिश्नर या नोटरी के सामने तस्दीक़।