कैविएट (धारा 148ए सीपीसी)
संभावित मामले में अंतरिम आदेश से पहले सुनवाई की माँग (90 दिन मान्य)।
यह काग़ज़ भरने के लिए तैयार दस्तावो में खुलता है, इस कंप्यूटर पर या ऐप में। खाते की ज़रूरत नहीं।
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अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।
काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान सिविल जज (जूनियर डिवीज़न), अमरनगर
बनाम
दीवानी प्रक्रिया संहिता की धारा 148ए के अंतर्गत कैविएट
निवेदन है कि:-
1.यह कि कैविएटर को आशंका है कि उपरोक्त व्यक्ति इस न्यायालय में मकान नं. 45, गुलाब कॉलोनी, अमरनगर बारे निषेधाज्ञा का दावा या प्रार्थना पत्र दाख़िल कर अंतरिम आदेश माँग सकता है।
2.यह कि कोई भी अंतरिम आदेश पारित होने से पहले सुनवाई का कैविएटर को अधिकार है, और दीवानी प्रक्रिया संहिता की धारा 148ए(3) के अनुसार इस कैविएट की प्रति उस व्यक्ति को रजिस्टर्ड डाक से भेज दी गई है।
3.यह कि ऐसा कोई मामला आने पर कोई आदेश पारित करने से पहले कैविएटर या उसके अधिवक्ता को सूचना दी जाए।
दिनांक: 12-10-2026
द्वारा अधिवक्ता
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- जिस आदेश या डिक्री को चुनौती मिलने की आशंका है उसकी प्रति, या संभावित मुक़दमे का ब्योरा (अदालत, पक्ष, विषय)
- संभावित प्रार्थी को रजिस्टर्ड डाक से भेजी गई कैविएट की प्रति की डाक रसीद और एडी कार्ड
- आपका पहचान पत्र, और आपके वकील के नाम आपके हस्ताक्षर वाला वकालतनामा
कहाँ जाना है
वकील के माध्यम से हर उस अदालत में दाख़िल होती है जहाँ मुक़दमा आ सकता है (जैसे ज़िला अदालत और उच्च न्यायालय), दूसरे पक्ष को रजिस्टर्ड डाक (एडी) से प्रति भेजने के बाद।
फ़ीस
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगते हैं; आज की राशि काउंटर पर पूछें। वकील की फ़ीस अलग है।
ध्यान दें
- कैविएट दाख़िल होने के 90 दिन बाद समाप्त हो जाती है; मुक़दमे की आशंका बनी रहे तो नई कैविएट दाख़िल करें।
- जब संभावित मुक़दमा दाख़िल होता है, तो अंतरिम आदेश से पहले आपको उसका नोटिस मिलता है; दिए गए पते पर संपर्क में रहें।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।