हक़ त्याग विलेख (रिलीज़ डीड)
वारिस द्वारा विरासती संपत्ति का अपना हिस्सा दूसरे सह-मालिक के हक़ में छोड़ना।
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काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
हक़ त्याग विलेख
यह हक़ त्याग विलेख आज दिनांक 12 अक्टूबर 2026 को अमरनगर में निम्नलिखित पक्षों के बीच लिखा व निष्पादित किया गया:-
सिमरन कौर पुत्री श्री गुरदेव सिंह, आयु लगभग 19 वर्ष, निवासी मकान नं. 88, मॉडल टाउन, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब (जिसे आगे "त्यागकर्ता" कहा गया है, और इस शब्द में संदर्भ के विपरीत न होने पर उसके वारिस, क़ानूनी प्रतिनिधि व समनुदेशिती शामिल होंगे) प्रथम पक्ष।
तथा
गुरदेव सिंह पुत्र श्री करनैल सिंह, आयु लगभग 48 वर्ष, निवासी मकान नं. 88, मॉडल टाउन, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब (जिसे आगे "जिसके हक़ में त्याग" कहा गया है, और इस शब्द में संदर्भ के विपरीत न होने पर उसके वारिस, क़ानूनी प्रतिनिधि व समनुदेशिती शामिल होंगे) द्वितीय पक्ष।
अब यह विलेख साक्षी है और दोनों पक्ष निम्नलिखित पर सहमत हैं:-
1.यह कि नीचे की अनुसूची में वर्णित संपत्ति (आगे "उक्त संपत्ति") करनैल सिंह की थी, जिनकी मृत्यु दिनांक 18-01-2024 को हुई, और उसमें त्यागकर्ता को एक-तिहाई हिस्सा विरासत में मिला।
2.यह कि प्रेम व स्नेह के कारण, बिना किसी प्रतिफल के, त्यागकर्ता उक्त संपत्ति में अपना सारा अधिकार, हक़, हित व हिस्सा उसके सह-मालिक के हक़ में त्यागता व छोड़ता है।
3.यह कि आज से त्यागकर्ता व उसके वारिसों का उक्त संपत्ति पर कोई अधिकार या दावा नहीं होगा, और जिसके हक़ में त्याग किया गया है वह इसका इंतक़ाल अपने नाम करवा सकता है।
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र (फ़ोटोकॉपी; दिखाने के लिए मूल)
- विरासत में हिस्सा मिलने का सबूत: विरासत का इंतक़ाल और जमाबंदी (फ़र्द), या वसीयत, उत्तराधिकार या क़ानूनी वारिस प्रमाण पत्र
- जिसके हक़ में त्याग है उससे रिश्ते का सबूत, जहाँ परिवार में हक़ त्याग पर कम शुल्क लगता है
- दोनों पक्ष (या उनके मुख़्तार), हर एक फ़ोटो पहचान पत्र के साथ, और जहाँ मूल्य के कारण आयकर नियम माँगें वहाँ पैन कार्ड
- हर पक्ष की दो पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो (दफ़्तर भी फ़ोटो और अँगूठे का निशान लेता है)
- फ़ोटो पहचान पत्र वाले दो गवाह, जो विलेख पर हस्ताक्षर करें और पक्षों की पहचान करें
कहाँ जाना है
रजिस्ट्री उस सब-रजिस्ट्रार के दफ़्तर में होती है जहाँ संपत्ति है (पंजाब और हरियाणा में प्रायः तहसीलदार या नायब तहसीलदार), जहाँ सुविधा हो वहाँ राज्य की ऑनलाइन रजिस्ट्री अपॉइंटमेंट से लिए समय पर; दोनों पक्ष और गवाह स्वयं हाज़िर होते हैं।
फ़ीस
हक़ त्याग पर स्टाम्प शुल्क राज्य की अनुसूची के अनुसार, हिस्से के मूल्य पर या निश्चित राशि; परिवार के भीतर हक़ त्याग पर अक्सर छूट मिलती है। रजिस्ट्री फ़ीस अलग है; ई-स्टाम्प ख़रीदने से पहले सब-रजिस्ट्रार से पूछें।
ध्यान दें
- हक़ त्याग केवल दूसरे सह-मालिक के हक़ में हो सकता है; किसी और को अपना हिस्सा देना हो तो बयनामा या दान पत्र बनाएँ।
- विलेख को हस्ताक्षर के चार महीने के भीतर रजिस्ट्री के लिए पेश करें; बाद में केवल ठोस कारण होने पर, अगले चार महीनों में और जुर्माने के साथ।
- रजिस्ट्री के बाद इंतक़ाल दर्ज करवाएँ, या नगर निकाय या प्राधिकरण का रिकॉर्ड बदलवाएँ: "इंतक़ाल हेतु प्रार्थना पत्र" देखें।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
डीड और इकरारनामों पर स्टाम्प शुल्क राज्य, दस्तावेज़ और उसकी राशि पर निर्भर करता है; कुछ का सब-रजिस्ट्रार के यहाँ पंजीकरण ज़रूरी है। स्टाम्प पेपर पर छापने से पहले मौजूदा शुल्क और नियम जाँच लें।