वाहन सुपुर्दारी पर छोड़ने हेतु प्रार्थना पत्र
मामले के दौरान ज़ब्त वाहन वापस लेना।
यह काग़ज़ भरने के लिए तैयार दस्तावो में खुलता है, इस कंप्यूटर पर या ऐप में। खाते की ज़रूरत नहीं।
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अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।
काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, अमरनगर
एफ़आईआर नं. 101 सन् 2026
बनाम
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 497 व 503 के अंतर्गत वाहन सुपुर्दारी पर छोड़ने हेतु प्रार्थना पत्र
निवेदन है कि:-
1.यह कि प्रार्थी के नाम पंजीकृत मोटरसाइकिल नं. PB-00-B-0000 को पुलिस ने दिनांक 02-10-2026 को एफ़आईआर नं. 101 दिनांक 02-10-2026 धारा 318 व 316(2) बीएनएस, थाना सिटी अमरनगर में क़ब्ज़े में लिया।
2.यह कि वाहन थाने में खुले में पड़ा है, उसकी हालत ख़राब हो रही है और आगे की जाँच के लिए उसकी ज़रूरत नहीं है; उसकी फ़ोटो और पंचनामा बनाया जा सकता है।
3.यह कि प्रार्थी वाहन सुरक्षित रखेगा, न बेचेगा न बदलेगा, निर्देश पर पेश करेगा और सुपुर्दारी बंधपत्र देने को तैयार है।
प्रार्थना:
अतः श्रीमान जी से प्रार्थना है कि मोटरसाइकिल नं. PB-00-B-0000 प्रार्थी को न्यायालय की उचित शर्तों पर सुपुर्दारी पर दिया जाए।
न्याय के हित में अन्य कोई राहत जो माननीय न्यायालय उचित समझे, वह भी दी जाए।
दिनांक: 12-10-2026
द्वारा अधिवक्ता
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- वाहन का पंजीकरण प्रमाण पत्र (आरसी) और बीमा (फ़ोटोकॉपी; दिखाने के लिए मूल)
- एफ़आईआर और ज़ब्ती मेमो की प्रति, अगर आपके पास हो
- क़र्ज़ पर लिए वाहन के लिए फ़ाइनेंसर का अनापत्ति पत्र (एनओसी)
- समर्थन वाला शपथ पत्र: "वाहन या सामान सुपुर्दारी पर छुड़ाने का शपथ पत्र" देखें
- आपका पहचान पत्र, और आपके वकील के नाम आपके हस्ताक्षर वाला वकालतनामा
कहाँ जाना है
आपके वकील के माध्यम से उस मजिस्ट्रेट की अदालत में दाख़िल होता है जहाँ मामला है; अदालत पुलिस रिपोर्ट मँगवाती है, फिर सुपुर्दारी बॉन्ड पर वाहन छोड़ने का आदेश देती है, प्रायः वाहन की फ़ोटो करवाने के बाद।
फ़ीस
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार; सुपुर्दारी बॉन्ड प्रायः अदालत के फ़ॉर्म पर होता है, कभी ज़मानती के साथ। आज की राशि काउंटर पर पूछें।
ध्यान दें
- अदालत जब कहे वाहन पेश करें, और मुक़दमा ख़त्म होने तक उसे न बेचें, न बदलें, न किसी और के नाम करवाएँ; विचारण के बाद अदालत उस पर अंतिम आदेश देती है।
- कुछ क़ानूनों में, जैसे आबकारी या एनडीपीएस क़ानून, ज़ब्त वाहनों पर दूसरे नियम लागू होते हैं; अपने वकील से पूछें।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।