मोटर दुर्घटना दावा याचिका (धारा 166 मोटर यान अधिनियम)
मृत्यु या चोटों के लिए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में दावा: दावेदार, पीड़ित, वाहन, चालक, मालिक, बीमा कंपनी, एफ़आईआर और मुआवज़े की मदें।
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काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
माननीय मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, अमरनगर के समक्ष
दावा याचिका नं. ______ सन् 2026
बनाम
तथा
तथा
मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 166 के अंतर्गत मोटर दुर्घटना में मृत्यु के मुआवज़े हेतु दावा याचिका
(दुर्घटना दिनांक 03-08-2026; वाहन नं. HR-00-X-0000)
निवेदन है कि:-
1.यह कि दावेदार ये हैं:
| क्र. | नाम, पिता या पति का नाम, आयु व पता | मृतक से रिश्ता |
|---|---|---|
| 1 | कुलदीप कौर विधवा स्व. श्री जसवंत सिंह, आयु लगभग 38 वर्ष, निवासी गाँव कल्याणपुर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब | विधवा |
| 2 | गुरप्रीत सिंह, नाबालिग पुत्र, आयु 14 वर्ष, अपनी माँ व संरक्षक कुलदीप कौर के माध्यम से, निवासी गाँव कल्याणपुर, तहसील व ज़िला अमरनगर | पुत्र |
| 3 | सुरजीत कौर विधवा हरि सिंह, आयु 68 वर्ष, निवासी गाँव कल्याणपुर, तहसील व ज़िला अमरनगर | माँ |
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- एफ़आईआर और, अगर दाख़िल हो, विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट (डीएआर), नक़्शा मौक़ा और मैकेनिकल जाँच रिपोर्ट की प्रमाणित प्रतियाँ
- मृत्यु के मामले में: मृत्यु प्रमाण पत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, और हर दावेदार के क़ानूनी वारिस होने का सबूत (परिवार रजिस्टर, राशन कार्ड, आधार)
- चोट के मामले में: एमएलआर, डिस्चार्ज समरी, इलाज के काग़ज़, हर बिल, और विकलांगता प्रमाण पत्र, अगर हो
- पीड़ित की आयु और आय का सबूत: मैट्रिक या जन्म प्रमाण पत्र, वेतन पर्चियाँ, आयकर रिटर्न, या ज़मीन और कारोबार का रिकॉर्ड
- टक्कर मारने वाले वाहन का नंबर और, अगर मिल सकें, उसकी आरसी, बीमा पॉलिसी और ड्राइवर के लाइसेंस की प्रतियाँ
- हर दावेदार का पहचान पत्र और बैंक खाते का ब्योरा (नाबालिग़ संरक्षक के माध्यम से दावा करता है), और आपके वकील के लिए वकालतनामा
कहाँ जाना है
वकील के माध्यम से मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (प्रायः ज़िला या अतिरिक्त ज़िला न्यायाधीश) में दाख़िल होती है, जहाँ दुर्घटना हुई, जहाँ आप रहते या काम करते हैं, या जहाँ कोई प्रतिवादी रहता है।
फ़ीस
कोर्ट फ़ीस राज्य के मोटर वाहन नियमों के अनुसार, जैसा अधिकरण का काउंटर तय करे (प्रायः एक तय फ़ीस, दावे की रक़म पर नहीं)। वकील की फ़ीस अलग है।
ध्यान दें
- जल्दी दाख़िल करें: 2019 के संशोधन ने दुर्घटना से छह महीने की सीमा रखी है (धारा 166(3)); अगर यह बीत चुकी है, तो तुरंत अपने वकील से पूछें।
- बीमा कंपनी या मालिक के किसी समझौते या रसीद पर अपने वकील के बिना हस्ताक्षर न करें; पहले मिली रक़म अवार्ड में से घटाई जाती है।
- हर क़ानूनी वारिस याचिका में हो, दावेदार के रूप में या फिर प्रतिवादी के रूप में; नाबालिग़ का हिस्सा प्रायः एफ़डी में रखा जाता है।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
वादपत्र, याचिका या अपील पर कोर्ट फ़ीस राहत और उसकी मालियत के अनुसार राज्य के कोर्ट फ़ीस क़ानून से तय होती है; कोर्ट फ़ीस टिकट (या ई-कोर्ट फ़ीस की रसीद) और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।