अस्थायी निषेधाज्ञा हेतु प्रार्थना पत्र (आदेश 39 नियम 1-2)
दावे के फ़ैसले तक रोक का आदेश।
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काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान सिविल जज (जूनियर डिवीज़न), अमरनगर
दीवानी दावा नं. 412 सन् 2025
बनाम
आदेश 39 नियम 1 व 2 सपठित धारा 151 सीपीसी के अंतर्गत अस्थायी निषेधाज्ञा हेतु प्रार्थना पत्र
निवेदन है कि:-
1.यह कि प्रार्थी ने उपरोक्त दावा दाख़िल किया है और वादपत्र की बातें इस प्रार्थना पत्र का भाग मानी जाएँ।
2.यह कि बयनामा और नक़्शे के अनुसार दीवार पूरी तरह प्रार्थी के प्लॉट में है।
3.यह कि यदि प्रतिवादी को मकान नं. 45, गुलाब कॉलोनी की चारदीवारी गिराने या उस पर निर्माण करने से न रोका गया, तो प्रार्थी को अपूरणीय क्षति होगी, क्योंकि गिराई गई दीवार पहले जैसी नहीं बन सकती।
4.यह कि सुविधा का संतुलन प्रार्थी के पक्ष में है और अंतरिम आदेश होने पर प्रार्थी आदेश 39 नियम 3ए का पालन करेगा।
प्रार्थना:
अतः श्रीमान जी से प्रार्थना है कि दावे के अंतिम निर्णय तक प्रतिवादी, उसके एजेंटों व कर्मचारियों को मकान नं. 45, गुलाब कॉलोनी की चारदीवारी गिराने या उस पर निर्माण करने से रोका जाए और तब तक अंतरिम निषेधाज्ञा दी जाए।
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- मालिकाना हक़ या क़ब्ज़े का सबूत: बयनामा, जमाबंदी (फ़र्द), इंतक़ाल और ख़सरा गिरदावरी, या किरायानामा
- विवादित हिस्सा दिखाने वाला नक़्शा, और दूसरा पक्ष जो कर रहा है उसकी तारीख़ वाली फ़ोटो
- संपत्ति के बारे में पुलिस शिकायतों, डीडीआर या पहले के आदेशों की प्रतियाँ
- साथ जाने वाला वादपत्र, और समर्थन वाला शपथ पत्र
- आपका पहचान पत्र, और आपके वकील के नाम आपके हस्ताक्षर वाला वकालतनामा
कहाँ जाना है
वकील के माध्यम से दावे के साथ उसी दीवानी अदालत में दाख़िल होता है; तुरंत अंतरिम रोक के लिए अदालत उसी दिन सुन सकती है, फिर दूसरे पक्ष को नोटिस भेजती है।
फ़ीस
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगते हैं; आज की राशि काउंटर पर पूछें। वकील की फ़ीस अलग है।
ध्यान दें
- अदालत देखती है कि पहली नज़र में मामला बनता है, ऐसा नुक़सान होगा जिसकी भरपाई न हो सके, और सुविधा का संतुलन किसके पक्ष में है; क़ब्ज़े का तारीख़वार सबूत सबसे ज़्यादा काम आता है।
- अगर बिना नोटिस आदेश होता है, तो प्रार्थना पत्र, वादपत्र और काग़ज़ों की प्रतियाँ तुरंत दूसरे पक्ष तक पहुँचनी चाहिए (आदेश 39 नियम 3); आपके वकील इन्हें भेजते हैं।
- अगर दूसरा पक्ष आदेश नहीं मानता, तो तुरंत अपने वकील को बताएँ: अदालत आदेश 39 नियम 2-ए के तहत कार्रवाई कर सकती है।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।