अपील लंबित रहते डिक्री के निष्पादन पर रोक (आदेश 41 नियम 5 सीपीसी)
अपील न्यायालय से अपीलाधीन डिक्री पर रोक: भारी नुक़सान, बिना देरी और पेश की गई प्रतिभूति (आदेश 41 नियम 5(3))।
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काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान ज़िला न्यायाधीश, अमरनगर
सिविल अपील नं. 77 सन् 2026
बनाम
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश 41 नियम 5 सपठित धारा 151 के अंतर्गत अपीलाधीन डिक्री के निष्पादन पर रोक हेतु प्रार्थना पत्र
निवेदन है कि:-
1.यह कि प्रार्थी ने विद्वान सिविल जज (जूनियर डिवीज़न), अमरनगर द्वारा पारित दिनांक 30-09-2026 के निर्णय व डिक्री के विरुद्ध उपरोक्त अपील दाख़िल की है, जिस डिक्री में अपीलकर्ता को प्रत्यर्थी को दावे की तारीख़ से 6% वार्षिक ब्याज सहित ₹3,27,581 देने का निर्देश है; अपील इस माननीय न्यायालय में लंबित है।
2.यह कि प्रत्यर्थी ने विद्वान निचले न्यायालय में इजराय का प्रार्थना पत्र दाख़िल किया है, जो दिनांक 05-11-2026 के लिए तय है, और अपीलकर्ता के मकान की कुर्की माँगी है।
3.यह कि अपील में तथ्य व क़ानून के महत्वपूर्ण प्रश्न उठते हैं और उसके सफल होने की पूरी संभावना है; अपील के आधार इस प्रार्थना पत्र का भाग माने जाएँ।
4.यह कि यदि डिक्री के निष्पादन (इजराय) पर रोक न लगाई गई, तो प्रार्थी को भारी नुक़सान होगा और अपील ही निरर्थक हो जाएगी, क्योंकि वह मकान अपीलकर्ता और उसके परिवार का इकलौता घर है, और एक बार कुर्क होकर बिक जाने पर अपील स्वीकार होने पर भी वापस नहीं मिल सकेगा।
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- जिस फ़ैसले और डिक्री के ख़िलाफ़ अपील है उनकी प्रमाणित प्रति, और दाख़िल की गई अपील का मेमो, उसके नंबर सहित
- इजराय शुरू हो गया हो तो उसके काग़ज़: नोटिस, या कुर्की या क़ब्ज़े का वारंट
- जिस नुक़सान का डर है उसका सबूत, जैसे यह दिखाने वाले काग़ज़ कि मकान ही आपका एकमात्र घर है या दुकान ही रोज़ी
- जो ज़मानत (सिक्योरिटी) आप दे सकते हैं: एफ़डी, संपत्ति के काग़ज़ (जमाबंदी या विलेख) या काग़ज़ों सहित ज़मानती
- आपका पहचान पत्र, और आपके वकील के नाम आपके हस्ताक्षर वाला वकालतनामा
कहाँ जाना है
आपके वकील के माध्यम से अपील के साथ अपीलीय अदालत में दाख़िल होता है (प्रायः ज़िला न्यायाधीश; उनकी सीमा से ऊपर उच्च न्यायालय); डिक्रीदार को नोटिस जाता है।
फ़ीस
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगते हैं; आज की राशि काउंटर पर पूछें। वकील की फ़ीस अलग है।
ध्यान दें
- केवल अपील से डिक्री नहीं रुकती: अदालत रोक तभी लगाती है जब भारी नुक़सान का डर हो, अर्ज़ी बेवजह देरी के बिना दी गई हो, और डिक्री के लिए ज़मानत दी जाए (आदेश 41 नियम 5(3))।
- रुपयों की डिक्री में अदालत प्रायः पूरी रक़म या उसका हिस्सा जमा कराने या उसकी ज़मानत देने को कहती है।
- अपील दाख़िल होने से पहले, डिक्री देने वाली अदालत भी पर्याप्त कारण पर रोक लगा सकती है, अगर अपील की मियाद के भीतर माँगा जाए।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
वादपत्र, याचिका या अपील पर कोर्ट फ़ीस राहत और उसकी मालियत के अनुसार राज्य के कोर्ट फ़ीस क़ानून से तय होती है; कोर्ट फ़ीस टिकट (या ई-कोर्ट फ़ीस की रसीद) और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।