इजराय (निष्पादन) प्रार्थना पत्र (आदेश 21 नियम 11)
उस डिक्री को लागू करवाना जिसका पालन नहीं हुआ।
यह काग़ज़ भरने के लिए तैयार दस्तावो में खुलता है, इस कंप्यूटर पर या ऐप में। खाते की ज़रूरत नहीं।
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अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।
काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान सिविल जज (जूनियर डिवीज़न), अमरनगर
दीवानी दावा नं. 412 सन् 2025
बनाम
आदेश 21 नियम 11 सीपीसी के अंतर्गत डिक्री के निष्पादन हेतु प्रार्थना पत्र
निवेदन है कि:-
1.यह कि डिक्रीदार को उपरोक्त दावे में दिनांक 02-06-2026 को डिक्री मिली, जिसमें मकान नं. 45, गुलाब कॉलोनी के भूतल का क़ब्ज़ा और ₹1,14,000 बकाया किराया दिया गया।
2.यह कि डिक्री के विरुद्ध कोई अपील लंबित नहीं है और इसके निष्पादन हेतु पहले कोई प्रार्थना पत्र नहीं दिया गया।
3.यह कि निर्णीत-ऋणी ने डिक्री की पूर्ति नहीं की है, अतः इसका निष्पादन इस प्रकार किया जाए: बेलिफ़ द्वारा क़ब्ज़ा दिलवाना और निर्णीत-ऋणी का बैंक खाता कुर्क करना।
प्रार्थना:
अतः श्रीमान जी से प्रार्थना है कि डिक्री का निष्पादन इस प्रकार किया जाए: बेलिफ़ द्वारा क़ब्ज़ा दिलवाना और निर्णीत-ऋणी का बैंक खाता कुर्क करना।
न्याय के हित में अन्य कोई राहत जो माननीय न्यायालय उचित समझे, वह भी दी जाए।
दिनांक: 12-10-2026
द्वारा अधिवक्ता
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- डिक्री की प्रमाणित प्रति, और फ़ैसले की
- बकाये का हिसाब: डिक्री की रक़म, ब्याज और ख़र्चा, जो पहले मिल चुका उसे घटाकर
- कुर्की के लिए डिक्री के देनदार की संपत्ति का ब्योरा: बैंक खाता, वेतन, ज़मीन (जमाबंदी), मकान या वाहन
- डिक्री के देनदार का मौजूदा पता
- आपका पहचान पत्र, और आपके वकील के नाम आपके हस्ताक्षर वाला वकालतनामा
कहाँ जाना है
आपके वकील के माध्यम से उस अदालत में दाख़िल होता है जिसने डिक्री दी, या जिस अदालत को डिक्री इजराय के लिए भेजी गई; अदालत नोटिस भेजती है और फिर कुर्की, नीलामी या क़ब्ज़े के वारंट जारी करती है।
फ़ीस
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट, और हर नोटिस या वारंट का तलबाना, अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार; आज की राशि काउंटर पर पूछें। वकील की फ़ीस अलग है।
ध्यान दें
- इजराय प्रायः डिक्री के 12 साल के भीतर माँगा जा सकता है; स्थायी निषेधाज्ञा की डिक्री पर ऐसी कोई सीमा नहीं।
- अगर डिक्री के देनदार की संपत्ति किसी दूसरे ज़िले में है, तो अदालत डिक्री को इजराय के लिए वहाँ भेज सकती है।
- पहले मिला हर भुगतान दिखाएँ: बकाये से ज़्यादा माँगने पर आपत्तियाँ आती हैं और देरी होती है।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।