दावा वापस लेने हेतु प्रार्थना पत्र (आदेश 23 नियम 1)
दावा वापस लेना, नया दावा दाख़िल करने की छूट सहित या बिना।
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काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान सिविल जज (जूनियर डिवीज़न), अमरनगर
दीवानी दावा नं. 412 सन् 2025
बनाम
आदेश 23 नियम 1 सीपीसी के अंतर्गत प्रार्थना पत्र
निवेदन है कि:-
1.यह कि प्रार्थी उपरोक्त दावा आगे नहीं चलाना चाहता, क्योंकि आर्थिक क्षेत्राधिकार न होने से दावा ग़लत अदालत में दाख़िल हो गया।
2.यह कि दावे में औपचारिक त्रुटि है, या पर्याप्त आधार हैं, जिनसे आदेश 23 नियम 1(3) के अंतर्गत नया दावा दाख़िल करने की अनुमति दी जा सकती है।
प्रार्थना:
अतः श्रीमान जी से प्रार्थना है कि प्रार्थी को उपरोक्त दावा वापस लेने की अनुमति दी जाए और उसी वाद-कारण पर नया दावा दाख़िल करने की छूट दी जाए।
न्याय के हित में अन्य कोई राहत जो माननीय न्यायालय उचित समझे, वह भी दी जाए।
दिनांक: 12-10-2026
द्वारा अधिवक्ता
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- मुख्य मुक़दमा: उसका नंबर और साल, अदालत, पक्षों के नाम और अगली तारीख़
- कारण लिखित में; दोबारा दावा करना हो तो तकनीकी कमी या दूसरा आधार (जैसे ग़लत मालियत, छूटा हुआ पक्ष या ग़लत अदालत)
- आपका पहचान पत्र: अदालत प्रायः दावा वापस लेने देने से पहले आपका अपना बयान दर्ज करती है
कहाँ जाना है
आपके वकील के माध्यम से उसी अदालत में दाख़िल होता है जहाँ दावा चल रहा है; आप प्रायः ख़ुद आते हैं, और अदालत आपका बयान दर्ज करके आदेश देती है।
फ़ीस
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगते हैं; आज की राशि काउंटर पर पूछें। वकील की फ़ीस अलग है।
ध्यान दें
- नया दावा करने की अदालत की अनुमति के बिना आप उसी दावे पर दोबारा मुक़दमा नहीं कर सकते, और अदालत आपसे दूसरे पक्ष का ख़र्चा दिलवा सकती है।
- अनुमति से किया गया नया दावा भी अपनी मियाद के भीतर होना चाहिए; पहले दावे में लगा समय नहीं छोड़ा जाता।
- अगर मामला सुलझ गया है, तो इसकी जगह समझौता दर्ज होता है: "संयुक्त समझौता बयान" देखें।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।