चेक केस में अंतरिम प्रतिकर (धारा 143-ए एनआई एक्ट)
चेक केस में शिकायतकर्ता की माँग कि विचारण के दौरान अभियुक्त चेक राशि का 20 प्रतिशत तक अदा करे।
यह काग़ज़ भरने के लिए तैयार दस्तावो में खुलता है, इस कंप्यूटर पर या ऐप में। खाते की ज़रूरत नहीं।
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अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।
काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, अमरनगर
शिकायत केस नं. 1093 सन् 2026
बनाम
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 143-ए के अंतर्गत अंतरिम प्रतिकर हेतु शिकायतकर्ता की ओर से प्रार्थना पत्र
निवेदन है कि:-
1.यह कि शिकायतकर्ता ने अमर सहकारी बैंक, अमरनगर पर आहरित ₹2,45,000 (दो लाख पैंतालीस हज़ार रुपये मात्र) के चेक नं. 004512 दिनांक 02-09-2026 के अनादरित (बाउंस) होने पर अभियुक्त के विरुद्ध परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत उपरोक्त शिकायत दाख़िल की है।
2.यह कि दिनांक 10-12-2026 को अभियुक्त पेश हुई और उसने अपराध स्वीकार नहीं किया, और विचारण माननीय न्यायालय में लंबित है।
3.यह कि अधिनियम की धारा 143-ए के अंतर्गत माननीय न्यायालय चेक जारी करने वाले को शिकायतकर्ता को अंतरिम प्रतिकर देने का आदेश दे सकता है, संक्षिप्त विचारण या सम्मन मामले में, जब वह अपराध स्वीकार न करे; यह राशि चेक की राशि के बीस प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- शिकायत, चेक, बैंक का रिटर्न मेमो और डाक प्रमाण सहित माँग नोटिस की प्रतियाँ
- जिस तारीख़ को अभियुक्त ने अपराध स्वीकार नहीं किया या आरोप तय हुआ, उस दिन का आदेश
- भुगतान के लिए आपके बैंक खाते का विवरण (रद्द किया हुआ चेक)
कहाँ जाना है
वकील के माध्यम से उसी मजिस्ट्रेट की अदालत में दाख़िल होता है जहाँ चेक केस चल रहा है।
फ़ीस
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगते हैं; आज की राशि काउंटर पर पूछें।
ध्यान दें
- अदालत चेक राशि के 20 प्रतिशत तक का आदेश दे सकती है; आदेश देना है या नहीं, और कितना, यह अदालत तय करती है।
- यदि अभियुक्त अंत में बरी होता है, तो आपको यह राशि ब्याज सहित लौटानी होगी।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।