वादपत्र नामंज़ूर करने हेतु प्रार्थना पत्र (आदेश 7 नियम 11 सीपीसी)

वादपत्र नामंज़ूर करवाने हेतु प्रतिवादी का प्रार्थना पत्र: वाद-कारण नहीं, मालियत कम, कोर्ट फ़ीस कम, या अपने ही कथनों से क़ानूनन वर्जित।

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काग़ज़ की शुरुआत

दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।

न्यायालय श्रीमान सिविल जज (जूनियर डिवीज़न), अमरनगर

दीवानी दावा नं. 598 सन् 2026

रोहन कुमार पुत्र श्री ओम प्रकाश, आयु लगभग 37 वर्ष, निवासी मकान नं. 12, गली नं. 3, नानक नगर, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब
…वादी

बनाम

कबीर शर्मा पुत्र श्री देव शर्मा, आयु लगभग 44 वर्ष, निवासी मकान नं. 7, बसंत विहार, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब
…प्रतिवादी / प्रार्थी

प्रतिवादी की ओर से सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश 7 नियम 11 के अंतर्गत वादपत्र नामंज़ूर करने हेतु प्रार्थना पत्र

निवेदन है कि:-

1.यह कि वादी ने प्रार्थी के विरुद्ध दिनांक 15-06-2021 को उधार दिए बताए गए ₹2,45,000 की वसूली का उपरोक्त दावा दाख़िल किया है।

2.यह कि वादपत्र और उसके साथ दाख़िल दस्तावेज़ों को, जिन्हें ही इस प्रार्थना पत्र के निर्णय के लिए देखा जाना है, सीधे पढ़ने पर वादपत्र सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश 7 नियम 11 के अंतर्गत निम्नलिखित आधारों पर नामंज़ूर किए जाने योग्य है:

(क)राहत की मालियत सही है, परंतु अदा की गई कोर्ट फ़ीस कम है (खंड (ग)): वादी ने ब्याज के रूप में ₹88,000 भी माँगे हैं, परंतु कोर्ट फ़ीस केवल ₹2,45,000 पर अदा की है; यदि न्यायालय के कहने पर वादी तय समय में कमी पूरी न करे, तो वादपत्र नामंज़ूर किया जाना है;

(ख)वादपत्र के कथनों से ही दावा परिसीमा अधिनियम, 1963 द्वारा वर्जित प्रतीत होता है (खंड (घ)): वादपत्र में ही लिखा है कि उधार दिनांक 15-06-2021 को माँगने पर लौटाने की शर्त पर दिया गया, और कोई लिखित स्वीकृति या आंशिक भुगतान नहीं बताया गया; दिनांक 01-09-2026 को दाख़िल दावा तीन वर्ष के बाद का है;

बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।

साथ क्या लाएँ

साथ लाने वाले काग़ज़

कहाँ जाना है

आपके वकील के माध्यम से उसी दीवानी अदालत में दाख़िल होता है जहाँ दावा चल रहा है, प्रायः शुरू में, लिखित कथन से पहले या उसके साथ; अदालत इसका फ़ैसला केवल वादपत्र और उसके दस्तावेज़ों पर करती है।

फ़ीस

जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगते हैं; आज की राशि काउंटर पर पूछें। वकील की फ़ीस अलग है।

ध्यान दें

काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।

स्टाम्प पेपर

वादपत्र, याचिका या अपील पर कोर्ट फ़ीस राहत और उसकी मालियत के अनुसार राज्य के कोर्ट फ़ीस क़ानून से तय होती है; कोर्ट फ़ीस टिकट (या ई-कोर्ट फ़ीस की रसीद) और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।