क़ानूनी प्रतिनिधियों (वारिसान) को रिकॉर्ड पर लाने हेतु प्रार्थना पत्र (आदेश 22 नियम 3/4 सीपीसी)
दीवानी मुक़दमे के दौरान किसी पक्ष की मृत्यु पर: 90 दिन में वारिसों को रिकॉर्ड पर लाना, या उपशमन रद्द करवाना।
यह काग़ज़ भरने के लिए तैयार दस्तावो में खुलता है, इस कंप्यूटर पर या ऐप में। खाते की ज़रूरत नहीं।
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अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।
काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान सिविल जज (जूनियर डिवीज़न), अमरनगर
दीवानी दावा नं. 412 सन् 2025
बनाम
आदेश 22 नियम 4 सपठित धारा 151 सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत मृतक प्रतिवादी के क़ानूनी प्रतिनिधियों (वारिसान) को रिकॉर्ड पर लाने हेतु प्रार्थना पत्र, उपशमन (एबेटमेंट) रद्द करने और देरी माफ़ करने की प्रार्थना सहित
निवेदन है कि:-
1.यह कि उपरोक्त मुक़दमा इस माननीय न्यायालय में लंबित है।
2.यह कि मुक़दमे के प्रतिवादी नं. 2 जगीर सिंह की मृत्यु दिनांक 02-05-2026 को हो गई, जिसकी जानकारी प्रार्थी को दिनांक 28-09-2026 को मिली।
3.यह कि मृतक अपने पीछे निम्नलिखित क़ानूनी प्रतिनिधि (वारिस) छोड़ गए हैं, जो अब मृतक की जायदाद का प्रतिनिधित्व करते हैं:
| क्रम | नाम | मृतक से रिश्ता | आयु | पता |
|---|---|---|---|---|
| 1 | बलवंत कौर | विधवा | 67 | गाँव कल्याणपुर, तहसील व ज़िला अमरनगर |
| 2 | गुरदेव सिंह | पुत्र | 48 | मकान नं. 88, मॉडल टाउन, अमरनगर |
| 3 | मनजीत कौर | पुत्री | 44 | मकान नं. 14, सेक्टर 9, शांतिपुर |
4.यह कि मुक़दमा चलाने का हक़ उपरोक्त क़ानूनी प्रतिनिधियों के विरुद्ध बना रहता है, और मुक़दमे के पूर्ण व प्रभावी निर्णय के लिए वे आवश्यक पक्षकार हैं।
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र (फ़ोटोकॉपी; दिखाने के लिए मूल)
- सभी क़ानूनी वारिसों की सूची, हर एक के रिश्ते, उम्र और पते सहित (परिवार रजिस्टर की नक़ल या वारिस प्रमाण पत्र, अगर हो)
- वसीयत या कोई और काग़ज़, अगर कोई उसके ज़रिए जायदाद पर दावा करता है
- देर से अर्ज़ी के लिए: मृत्यु का पता आपको कब और कैसे चला, इसका सबूत
- मुख्य मुक़दमा: उसका नंबर और साल, अदालत, पक्षों के नाम और अगली तारीख़
कहाँ जाना है
आपके वकील के माध्यम से उसी अदालत में, जहाँ मुक़दमा या अपील चल रही है, संशोधित पक्षकार सूची सहित दाख़िल होता है; वारिसों और दूसरे पक्ष को नोटिस जाता है, और अदालत तय करती है कि जायदाद का प्रतिनिधित्व कौन करेगा।
फ़ीस
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगते हैं; आज की राशि काउंटर पर पूछें। वकील की फ़ीस अलग है।
ध्यान दें
- मृत्यु के 90 दिन के भीतर अर्ज़ी दें; उसके बाद मृतक के बारे में मुक़दमा समाप्त (एबेट) हो जाता है, और अगले 60 दिन में इसे रद्द कराने की अर्ज़ी दी जा सकती है। उसके बाद केवल देरी के ठोस कारण के साथ।
- निजी क़ानून जिन्हें वारिस मानता है, उन सबके नाम दें; हिंदू क़ानून में इसमें विधवा, माँ और बेटियाँ, विवाहित हों या नहीं, शामिल हैं।
- मृत्यु की सूचना तुरंत अपने वकील को दें; वकील को अदालत को बताना होता है (आदेश 22 नियम 10-ए)।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।