ज़मानत रद्द करने हेतु प्रार्थना पत्र (धारा 480(5)/483(3) बीएनएसएस)
ज़मानत के दुरुपयोग पर अभियुक्त की ज़मानत रद्द करवाने हेतु शिकायतकर्ता का प्रार्थना पत्र: धमकी, छेड़छाड़, नया अपराध, ग़ैरहाज़िरी या शर्तें तोड़ना।
यह काग़ज़ भरने के लिए तैयार दस्तावो में खुलता है, इस कंप्यूटर पर या ऐप में। खाते की ज़रूरत नहीं।
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काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान सत्र न्यायाधीश, अमरनगर
एफ़आईआर नं. 88 सन् 2026
बनाम
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 483(3) के अंतर्गत अभियुक्त की ज़मानत रद्द करने हेतु प्रार्थना पत्र
निवेदन है कि:-
1.यह कि प्रार्थी की शिकायत पर एफ़आईआर नं. 88 दिनांक 20-08-2026 धारा 333 व 115(2) बीएनएस, थाना सिटी अमरनगर दर्ज हुई, और उसमें अभियुक्त को इस माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 05-09-2026 के आदेश से ज़मानत पर रिहा किया गया, ऐसी शर्तों पर जिनमें यह भी शामिल है कि अभियुक्त शिकायतकर्ता या गवाहों से संपर्क नहीं करेगा।
2.यह कि रिहा होने के बाद अभियुक्त ने उसे मिली स्वतंत्रता का निम्नलिखित तरीक़ों से दुरुपयोग किया है:
(क)प्रार्थी व अभियोजन के गवाहों को धमकाकर: दिनांक 01-10-2026 को लगभग रात 8 बजे अभियुक्त दो अन्य व्यक्तियों के साथ प्रार्थी के घर आया और कहा कि यदि उसने उसके विरुद्ध गवाही दी तो उसे और उसके परिवार को जान से मार दिया जाएगा;
(ख)ज़मानत आदेश की शर्तें तोड़कर: अभियुक्त चश्मदीद गवाह रोहन कुमार से दिनांक 25-09-2026 को और फिर 03-10-2026 को मिला और उसे मुकर जाने को कहा;
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- ज़मानत देने वाले आदेश की प्रमाणित प्रति, शर्तों सहित
- एफ़आईआर की प्रति
- दुरुपयोग का प्रमाण: पुलिस को दी गई शिकायतों या डीडीआर की प्रतियाँ, कॉल रिकॉर्डिंग या संदेश, मेडिकल काग़ज़, या नई एफ़आईआर की प्रति
- आधार कार्ड या कोई अन्य फ़ोटो पहचान पत्र (फ़ोटोकॉपी; दिखाने के लिए मूल)
कहाँ जाना है
आमतौर पर वकील के माध्यम से उसी अदालत में दाख़िल होता है जिसने ज़मानत दी, या सत्र न्यायालय में; एक प्रति सरकारी वकील को जाती है। उच्च न्यायालय में यह अलग CRM-M याचिका होती है।
फ़ीस
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगते हैं; आज की राशि काउंटर पर पूछें।
ध्यान दें
- अदालतें ज़मानत केवल ठोस आधार पर रद्द करती हैं, जैसे धमकी, छेड़छाड़ या नया अपराध; शब्दों से ज़्यादा तारीख़वार सबूत काम आते हैं।
- हर नई धमकी की सूचना तुरंत पुलिस को दें और रसीद रखें; ख़तरे में 112 पर फ़ोन करें।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।