उन्मोचन (डिस्चार्ज) हेतु प्रार्थना पत्र (धारा 250/262 बीएनएसएस)
आरोप तय होने से पहले, सुपुर्दगी या प्रतियाँ मिलने के 60 दिन में, अभियुक्त की उन्मोचन (डिस्चार्ज) की माँग।
यह काग़ज़ भरने के लिए तैयार दस्तावो में खुलता है, इस कंप्यूटर पर या ऐप में। खाते की ज़रूरत नहीं।
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अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।
काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, अमरनगर
फ़ौजदारी मुक़दमा नं. 1402 सन् 2026
बनाम
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 262 के अंतर्गत उन्मोचन (डिस्चार्ज) हेतु अभियुक्त की ओर से प्रार्थना पत्र
निवेदन है कि:-
1.यह कि प्रार्थी उपरोक्त मामले में अभियुक्त है, जो एफ़आईआर नं. 64 दिनांक 05-06-2026 धारा 318(4) व 316(2) बीएनएस, थाना सिटी अमरनगर से उत्पन्न हुआ है। पुलिस रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज़ों की प्रतियाँ संहिता की धारा 230 के अंतर्गत दिनांक 28-09-2026 को प्रार्थी को दी गईं, और संहिता की धारा 262(1) के अनुसार यह प्रार्थना पत्र उस तारीख़ से साठ दिन के भीतर दिया जा रहा है।
2.यह कि इस चरण पर माननीय न्यायालय को मामले के रिकॉर्ड और उसके साथ भेजे गए दस्तावेज़ों पर विचार करना है तथा अभियुक्त और अभियोजन को सुनना है; यदि आरोप निराधार है, तो अभियुक्त को उन्मोचित (डिस्चार्ज) किया जाना है।
3.यह कि अभियोजन का पूरा मामला जैसा है वैसा मान लेने पर भी प्रार्थी के विरुद्ध कोई अपराध नहीं बनता, जिसके कारण ये हैं:
(क)शिकायतकर्ता के अपने बयान और रिकॉर्ड पर मौजूद बिलों से स्पष्ट है कि माल उधार पर लिया गया था और ₹2,45,000 की क़ीमत में से ₹1,20,000 दिए जा चुके हैं; विवाद केवल बाक़ी क़ीमत का है, जो दीवानी देनदारी है;
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- अदालत से मिली पुलिस रिपोर्ट (चालान) और दस्तावेज़ों की प्रतियाँ
- प्रतियाँ मिलने की तारीख़, या सत्र न्यायालय को सुपुर्दगी की तारीख़, दिखाने वाला आदेश या ज़िमनी
- एफ़आईआर की प्रति
कहाँ जाना है
आरोप तय होने से पहले वकील के माध्यम से विचारण न्यायालय (मजिस्ट्रेट या सत्र न्यायालय) में दाख़िल होता है।
फ़ीस
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगते हैं; आज की राशि काउंटर पर पूछें।
ध्यान दें
- प्रतियाँ मिलने (वारंट केस) या सुपुर्दगी (सत्र मामला) के 60 दिन के भीतर दाख़िल करें।
- जब तक अदालत छूट न दे, हर तारीख़ पर हाज़िर होते रहें।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।