पुलिस रिपोर्ट व दस्तावेज़ों की प्रतियों हेतु प्रार्थना पत्र (धारा 230 बीएनएसएस)

आरोप तय होने से पहले चालान के दस्तावेज़ों की पूरी व पढ़ने योग्य प्रतियाँ माँगना।

दस्तावो में मुफ़्त बनाएँ

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काग़ज़ की शुरुआत

दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।

न्यायालय श्रीमान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, अमरनगर

फ़ौजदारी मामला (सीआईएस) नं. 0000 सन् 2026

रोहन कुमार पुत्र श्री ओम प्रकाश, आयु लगभग 37 वर्ष, निवासी मकान नं. 12, गली नं. 3, नानक नगर, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब
…प्रार्थी / अभियुक्त

बनाम

पंजाब राज्य
…प्रत्यर्थी / राज्य

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 230 (पुरानी धारा 207 सीआरपीसी) के अंतर्गत पुलिस रिपोर्ट व दस्तावेज़ों की पूरी व पढ़ने योग्य प्रतियाँ देने हेतु प्रार्थना पत्र

निवेदन है कि:-

1.यह कि एफ़आईआर नं. 000/2026 दिनांक 14-03-2026 धारा 115(2) व 351(2) बीएनएस, थाना सदर अमरनगर में पुलिस ने संहिता की धारा 193 के अंतर्गत रिपोर्ट (चालान) दिनांक 20-07-2026 को दाख़िल कर दी है, और प्रार्थी उपरोक्त मामले में अभियुक्त के रूप में कार्यवाही का सामना कर रहा है।

2.यह कि संहिता की धारा 230 के अंतर्गत प्रार्थी पुलिस रिपोर्ट, प्रथम सूचना रिपोर्ट, धारा 180(3) के अंतर्गत दर्ज बयानों, धारा 183 के अंतर्गत दर्ज संस्वीकृतियों (इक़बालिया बयानों) व बयानों, और पुलिस रिपोर्ट के साथ न्यायालय को भेजे गए हर अन्य दस्तावेज़ या उसके संबंधित अंश की प्रतियाँ निःशुल्क पाने का हक़दार है।

3.यह कि दिनांक 25-08-2026 को प्रार्थी को दी गई प्रतियाँ पूरी नहीं हैं: निम्नलिखित दस्तावेज़ या तो दिए ही नहीं गए, या दी गई प्रतियाँ पढ़ने योग्य नहीं हैं या अधूरी हैं:

बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।

साथ क्या लाएँ

साथ लाने वाले काग़ज़

कहाँ जाना है

आपके वकील के माध्यम से उस मजिस्ट्रेट की अदालत में, जहाँ चालान है, आरोप पर बहस से पहले दाख़िल होता है; अदालत अभियोजन को प्रतियाँ देने का निर्देश देती है।

फ़ीस

धारा 230 के तहत प्रतियाँ आरोपी को मुफ़्त मिलती हैं; प्रार्थना पत्र पर कोई कोर्ट फ़ीस या वेलफ़ेयर टिकट लगे तो अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार।

ध्यान दें

काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।

स्टाम्प पेपर

जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।