अभिवचनों में संशोधन हेतु प्रार्थना पत्र (आदेश 6 नियम 17)
वादपत्र या लिखित कथन में बदलाव की अनुमति।
यह काग़ज़ भरने के लिए तैयार दस्तावो में खुलता है, इस कंप्यूटर पर या ऐप में। खाते की ज़रूरत नहीं।
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अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।
काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान सिविल जज (जूनियर डिवीज़न), अमरनगर
दीवानी दावा नं. 412 सन् 2025
बनाम
आदेश 6 नियम 17 सीपीसी के अंतर्गत वादपत्र में संशोधन हेतु प्रार्थना पत्र
निवेदन है कि:-
1.यह कि प्रार्थी वादपत्र में निम्नलिखित संशोधन करना चाहता है:
(क)दिनांक 01-01-2025 से अंतःकालीन लाभ की प्रार्थना जोड़ना;
2.यह कि पक्षों के वास्तविक विवाद के निर्णय हेतु संशोधन आवश्यक है, इससे मुक़दमे का स्वरूप नहीं बदलता, और पूरी सावधानी के बावजूद यह पहले नहीं माँगा जा सका, क्योंकि प्रतिवादी ने दावा दाख़िल होने के बाद ही किराया देना बंद किया।
3.यह कि विपक्षी को कोई हानि नहीं होगी और ख़र्च देकर क्षतिपूर्ति हो सकती है।
प्रार्थना:
अतः श्रीमान जी से प्रार्थना है कि प्रार्थी को उपरोक्त प्रस्तावित अनुसार वादपत्र में संशोधन की अनुमति दी जाए।
न्याय के हित में अन्य कोई राहत जो माननीय न्यायालय उचित समझे, वह भी दी जाए।
दिनांक: 12-10-2026
द्वारा अधिवक्ता
सत्यापन
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- मुख्य मुक़दमा: उसका नंबर और साल, अदालत, पक्षों के नाम और अगली तारीख़
- दाख़िल किए गए वादपत्र या लिखित कथन की प्रति, पैराग्राफ़ नंबरों सहित
- जो बदलाव चाहिए, पैराग्राफ़ दर पैराग्राफ़ (पुराने शब्द और नए), और हर नए तथ्य के पीछे के काग़ज़
- समर्थन वाला शपथ पत्र: "वादपत्र या प्रार्थना पत्र के समर्थन में शपथ पत्र" देखें
कहाँ जाना है
आपके वकील के माध्यम से उसी अदालत में दाख़िल होता है जहाँ दावा चल रहा है; दूसरे पक्ष को प्रति मिलती है और वह जवाब दे सकता है। मंज़ूर होने पर संशोधित अभिवचन अदालत की तय तारीख़ तक दाख़िल किया जाता है।
फ़ीस
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगते हैं; आज की राशि काउंटर पर पूछें। वकील की फ़ीस अलग है।
ध्यान दें
- मुक़दमे की सुनवाई (ट्रायल) शुरू होने के बाद संशोधन तभी मिलता है जब आप दिखाएँ कि पूरी सावधानी के बावजूद आप इसे पहले नहीं उठा सकते थे।
- अगर संशोधन से दावे की मालियत बढ़ती है, तो संशोधित वादपत्र पर बाक़ी कोर्ट फ़ीस देनी होती है; अदालत ख़र्चा (कॉस्ट) भी लगा सकती है।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।