उच्च न्यायालय में नियमित ज़मानत याचिका (धारा 483 बीएनएसएस)
निचली अदालतों से इनकार के बाद पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में नियमित ज़मानत (CRM-M): हिरासत, चरण, पिछले आदेश, अन्य मामले और आधार।
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अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।
काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ में
CRM-M नं. ______ सन् 2026
बनाम
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 483 के अंतर्गत याचिकाकर्ता को नियमित ज़मानत देने हेतु याचिका
(एफ़आईआर नं. 118 दिनांक 14-08-2026 धारा 318(4) व 61(2) बीएनएस, थाना सिटी अमरनगर में)
निवेदन है कि:-
1.यह कि याचिकाकर्ता दिनांक 16-08-2026 से एफ़आईआर नं. 118 दिनांक 14-08-2026 धारा 318(4) व 61(2) बीएनएस, थाना सिटी अमरनगर में हिरासत में है और ज़िला जेल, अमरनगर में बंद है। जेल अधिकारियों द्वारा जारी हिरासत प्रमाण पत्र इस याचिका के साथ संलग्न है।
2.यह कि याचिकाकर्ता निर्दोष है और उसे इस मामले में झूठा फँसाया गया है।
3.यह कि इस समय पुलिस रिपोर्ट (चालान) पेश हो चुकी है, परंतु आरोप अभी तय नहीं हुए; अभियोजन के 20 गवाह हैं और अब तक किसी की गवाही नहीं हुई।
4.यह कि याचिकाकर्ता ने निचली अदालतों में ज़मानत माँगी थी, जिन प्रार्थना पत्रों का निर्णय इस प्रकार हुआ; आदेशों की प्रमाणित प्रतियाँ इस याचिका के साथ संलग्न हैं:
| क्र. | न्यायालय | आदेश की तारीख़ | परिणाम |
|---|---|---|---|
| 1 | विद्वान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, अमरनगर | 10-09-2026 | ख़ारिज |
| 2 | विद्वान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, अमरनगर | 30-10-2026 | ख़ारिज |
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- एफ़आईआर की प्रति
- जेल अधीक्षक से हिरासत प्रमाण पत्र
- ज़मानत नामंज़ूर करने वाले निचली अदालतों के आदेशों की प्रमाणित प्रतियाँ
- चालान और गवाहों की सूची की प्रति, यदि पेश हो; याचिकाकर्ता के विरुद्ध किसी अन्य मामले का विवरण
- याचिकाकर्ता का आधार, और शपथ पत्र देने वाले रिश्तेदार (पैरोकार) का आधार
- जेल में याचिकाकर्ता द्वारा हस्ताक्षरित और वहीं तस्दीक़ वकालतनामा
कहाँ जाना है
वकील के माध्यम से पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ के फ़ाइलिंग काउंटर पर दाख़िल होती है; वकील इस पर हस्ताक्षर करते हैं और वकालतनामा लगाते हैं।
फ़ीस
याचिका और वकालतनामे पर कोर्ट फ़ीस टिकट और वेलफ़ेयर टिकट उच्च न्यायालय के नियमों के अनुसार लगते हैं; आज की राशि फ़ाइलिंग काउंटर पर पूछें। वकील की फ़ीस अलग है।
ध्यान दें
- ज़मानत आमतौर पर पहले सत्र न्यायालय में माँगी जाती है; उसके इनकार के बाद उच्च न्यायालय में याचिका आती है।
- ज़मानत मिलने पर विचारण न्यायालय या ड्यूटी मजिस्ट्रेट के लिए दो ज़मानती और उनके काग़ज़ तैयार रखें।
- उच्च न्यायालय का काम अंग्रेज़ी में होता है: वकील अंग्रेज़ी रूप दाख़िल करते हैं, और हिंदी या पंजाबी के किसी भी काग़ज़ का आमतौर पर टाइप किया अंग्रेज़ी अनुवाद लगता है।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
उच्च न्यायालय: याचिका और वकालतनामे पर कोर्ट फ़ीस टिकट (या ई-कोर्ट फ़ीस रसीद) और वेलफ़ेयर टिकट उच्च न्यायालय के नियमों और उसके फ़ाइलिंग काउंटर के निर्देश अनुसार लगते हैं; मौजूदा राशि वहीं पूछें।