घरेलू हिंसा प्रार्थना पत्र (धारा 12)

संरक्षण, निवास व आर्थिक सहायता हेतु महिला का मजिस्ट्रेट को प्रार्थना पत्र।

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अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।

काग़ज़ की शुरुआत

दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।

न्यायालय श्रीमान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, अमरनगर

नेहा वर्मा पत्नी श्री अनिल वर्मा, आयु लगभग 28 वर्ष, निवासी मकान नं. 204, सेक्टर 9, शांतिपुर, ज़िला शांतिपुर, हरियाणा
…पीड़ित व्यक्ति

बनाम

अनिल वर्मा पुत्र श्री रमेश वर्मा, आयु लगभग 31 वर्ष, निवासी मकान नं. 204, सेक्टर 9, शांतिपुर, ज़िला शांतिपुर, हरियाणा
…प्रतिवादी

घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 की धारा 12 के अंतर्गत प्रार्थना पत्र

निवेदन है कि:-

1.यह कि प्रार्थिनी प्रतिवादी नं. 1 की पत्नी है, और उसकी माँ कमला देवी उसके रिश्तेदार हैं जो उनके साथ रहते थे। प्रार्थिनी व प्रतिवादी मकान नं. 204, सेक्टर 9, शांतिपुर स्थित साझा घर में साथ रहे, और घरेलू संबंध में हैं।

2.यह कि प्रतिवादियों ने प्रार्थिनी के साथ घरेलू हिंसा की, जिसमें शामिल है:

(क)दिनांक 20-05-2024 को ₹2,00,000 की माँग को लेकर प्रतिवादी नं. 1 ने उसे थप्पड़ मारा और धक्का दिया

(ख)दिनांक 01-06-2024 को उसे बेटी सहित घर से निकाल दिया गया

3.यह कि प्रार्थिनी अनुरोध करती है कि संरक्षण अधिकारी को घरेलू घटना रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया जाए।

4.यह कि प्रार्थिनी को अपनी सुरक्षा का भय है और उसे इस न्यायालय के संरक्षण की आवश्यकता है।

प्रार्थना:

अतः श्रीमान जी से प्रार्थना है कि प्रतिवादी(यों) के विरुद्ध ये आदेश पारित किए जाएँ: संरक्षण आदेश, निवास आदेश, ₹20,000 मासिक आर्थिक राहत, बेटी की संरक्षा और ₹2,00,000 मुआवज़ा, और तब तक धारा 23 के अंतर्गत अंतरिम व एकपक्षीय आदेश दिए जाएँ।

बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।

साथ क्या लाएँ

साथ लाने वाले काग़ज़

कहाँ जाना है

वकील, संरक्षण अधिकारी या सेवा प्रदाता संस्था के माध्यम से उस क्षेत्र के न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने दाख़िल होता है जहाँ आप रहती हैं (अस्थायी रूप से भी), जहाँ प्रतिवादी रहता है या जहाँ हिंसा हुई; पहली सुनवाई आमतौर पर तीन दिन के भीतर तय होती है।

फ़ीस

प्रायः बहुत कम या कोई कोर्ट फ़ीस नहीं लगती; अदालत के दफ़्तर से पूछें। संरक्षण अधिकारी मुफ़्त मदद करते हैं, और ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण से मुफ़्त क़ानूनी सहायता मिलती है।

ध्यान दें

काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।

स्टाम्प पेपर

जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।