तलाक़ की याचिका, विवादित (धारा 13 हिंदू विवाह अधिनियम)

धारा 13(1) (क्रूरता, परित्याग, जारकर्म आदि) या 13(1ए) के आधारों पर एक जीवनसाथी की तलाक़ याचिका, अधिनियम में माँगे गए कथनों सहित।

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काग़ज़ की शुरुआत

दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।

न्यायालय श्रीमान प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय, अमरनगर

हिंदू विवाह अधिनियम याचिका नं. ______ सन् 2026

मीरा शर्मा पत्नी श्री कबीर शर्मा, आयु लगभग 41 वर्ष, निवासी मकान नं. 31, रणजीत नगर, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब
…याचिकाकर्ता

बनाम

कबीर शर्मा पुत्र श्री देव शर्मा, आयु लगभग 44 वर्ष, निवासी मकान नं. 7, बसंत विहार, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब
…प्रतिवादी

हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के अंतर्गत तलाक़ की डिक्री द्वारा विवाह-विच्छेद हेतु याचिका

निवेदन है कि:-

1.यह कि याचिकाकर्ता और प्रतिवादी का विवाह दिनांक 25-11-2012 को अमरनगर में हिंदू रीति-रिवाज़ों से संपन्न हुआ। दोनों पक्षों पर हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 लागू होता है।

2.यह कि इस विवाह से निम्नलिखित संतान हुई:

क्रमनामजन्म तिथिकिसके पास
1आरव शर्मा19-08-2014याचिकाकर्ता (माता)

3.यह कि विवाह के बाद पक्ष पति-पत्नी के रूप में साथ रहे, आख़िरी बार मकान नं. 7, बसंत विहार, अमरनगर में, और दिनांक 10-04-2023 से वे अलग रह रहे हैं।

4.यह कि याचिकाकर्ता निम्नलिखित आधारों पर तलाक़ की डिक्री द्वारा विवाह-विच्छेद चाहती है:

(क)क्रूरता (धारा 13(1)(ia)): विवाह संपन्न होने के बाद प्रतिवादी ने याचिकाकर्ता के साथ क्रूरता का व्यवहार किया है, जो इस प्रकार है: वर्ष 2019 से प्रतिवादी बच्चे और रिश्तेदारों के सामने याचिकाकर्ता से अक्सर गाली-गलौज करता रहा; दिनांक 02-03-2023 को उसने उसे पीटा, जिसका इलाज सिविल अस्पताल, अमरनगर में हुआ; दिनांक 10-04-2023 को उसने उसे और बच्चे को वैवाहिक घर से निकाल दिया; और तब से वह उसे धमकी भरे और उसके चरित्र पर झूठे आरोप लगाने वाले संदेश भेजता रहा है;

बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।

साथ क्या लाएँ

साथ लाने वाले काग़ज़

कहाँ जाना है

वकील के माध्यम से उस ज़िले के पारिवारिक न्यायालय (न हो तो ज़िला न्यायाधीश) में दाख़िल होती है जहाँ विवाह हुआ, जहाँ दूसरा जीवनसाथी रहता है, जहाँ आप आख़िरी बार साथ रहे या, पत्नी के लिए, जहाँ वह अब रहती है। न्यायालय आमतौर पर पहले पक्षों को मध्यस्थता या काउंसलिंग के लिए भेजता है।

फ़ीस

जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगते हैं; आज की राशि काउंटर पर पूछें। वकील की फ़ीस अलग है।

ध्यान दें

काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।

स्टाम्प पेपर

इस याचिका या प्रार्थना पत्र पर कोर्ट फ़ीस राज्य के कोर्ट फ़ीस क़ानून से तय होती है; कोर्ट फ़ीस टिकट (या ई-कोर्ट फ़ीस की रसीद) और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।