तलाक़ की याचिका, विवादित (धारा 13 हिंदू विवाह अधिनियम)
धारा 13(1) (क्रूरता, परित्याग, जारकर्म आदि) या 13(1ए) के आधारों पर एक जीवनसाथी की तलाक़ याचिका, अधिनियम में माँगे गए कथनों सहित।
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काग़ज़ की शुरुआत
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न्यायालय श्रीमान प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय, अमरनगर
हिंदू विवाह अधिनियम याचिका नं. ______ सन् 2026
बनाम
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के अंतर्गत तलाक़ की डिक्री द्वारा विवाह-विच्छेद हेतु याचिका
निवेदन है कि:-
1.यह कि याचिकाकर्ता और प्रतिवादी का विवाह दिनांक 25-11-2012 को अमरनगर में हिंदू रीति-रिवाज़ों से संपन्न हुआ। दोनों पक्षों पर हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 लागू होता है।
2.यह कि इस विवाह से निम्नलिखित संतान हुई:
| क्रम | नाम | जन्म तिथि | किसके पास |
|---|---|---|---|
| 1 | आरव शर्मा | 19-08-2014 | याचिकाकर्ता (माता) |
3.यह कि विवाह के बाद पक्ष पति-पत्नी के रूप में साथ रहे, आख़िरी बार मकान नं. 7, बसंत विहार, अमरनगर में, और दिनांक 10-04-2023 से वे अलग रह रहे हैं।
4.यह कि याचिकाकर्ता निम्नलिखित आधारों पर तलाक़ की डिक्री द्वारा विवाह-विच्छेद चाहती है:
(क)क्रूरता (धारा 13(1)(ia)): विवाह संपन्न होने के बाद प्रतिवादी ने याचिकाकर्ता के साथ क्रूरता का व्यवहार किया है, जो इस प्रकार है: वर्ष 2019 से प्रतिवादी बच्चे और रिश्तेदारों के सामने याचिकाकर्ता से अक्सर गाली-गलौज करता रहा; दिनांक 02-03-2023 को उसने उसे पीटा, जिसका इलाज सिविल अस्पताल, अमरनगर में हुआ; दिनांक 10-04-2023 को उसने उसे और बच्चे को वैवाहिक घर से निकाल दिया; और तब से वह उसे धमकी भरे और उसके चरित्र पर झूठे आरोप लगाने वाले संदेश भेजता रहा है;
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- विवाह का सबूत: पंजीकरण हुआ हो तो विवाह प्रमाण पत्र, नहीं तो शादी का कार्ड और रस्मों की फ़ोटो
- आधार कार्ड या कोई अन्य फ़ोटो पहचान पत्र, मौजूदा पते के सबूत सहित (फ़ोटोकॉपी; दिखाने के लिए मूल)
- न्यायालय के नोटिस के लिए दूसरे जीवनसाथी का पूरा मौजूदा पता (और फ़ोन नंबर, यदि पता हो)
- बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र, यदि बच्चे हों (फ़ोटोकॉपी)
- हर आधार के समर्थन के काग़ज़, तारीख़ों सहित: मेडिकल रिकॉर्ड, पुलिस शिकायतें या डीडीआर, संदेश और पत्र, और गवाहों के नाम-पते
- आपके बीच किसी पुराने या लंबित मुक़दमे की याचिकाओं और आदेशों की प्रतियाँ: भरण-पोषण, घरेलू हिंसा, एफ़आईआर या कोई अन्य याचिका
- पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो, आमतौर पर दो या तीन
कहाँ जाना है
वकील के माध्यम से उस ज़िले के पारिवारिक न्यायालय (न हो तो ज़िला न्यायाधीश) में दाख़िल होती है जहाँ विवाह हुआ, जहाँ दूसरा जीवनसाथी रहता है, जहाँ आप आख़िरी बार साथ रहे या, पत्नी के लिए, जहाँ वह अब रहती है। न्यायालय आमतौर पर पहले पक्षों को मध्यस्थता या काउंसलिंग के लिए भेजता है।
फ़ीस
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगते हैं; आज की राशि काउंटर पर पूछें। वकील की फ़ीस अलग है।
ध्यान दें
- विवाह के एक वर्ष के भीतर तलाक़ की याचिका तभी दाख़िल हो सकती है जब न्यायालय असाधारण कठिनाई के कारण इसकी अनुमति दे (धारा 14)।
- यदि दोनों सहमत हों तो आपसी सहमति से तलाक़ (धारा 13-बी) आमतौर पर जल्दी होता है: "आपसी सहमति से तलाक़, पहली मोशन" देखें।
- मुक़दमा चलते समय गुज़ारा भत्ता और मुक़दमे का ख़र्च माँगा जा सकता है: "अंतरिम भरण-पोषण व मुक़दमे का ख़र्च (धारा 24 हिंदू विवाह अधिनियम)" देखें।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
इस याचिका या प्रार्थना पत्र पर कोर्ट फ़ीस राज्य के कोर्ट फ़ीस क़ानून से तय होती है; कोर्ट फ़ीस टिकट (या ई-कोर्ट फ़ीस की रसीद) और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।