तलाक़ समझौते की शर्तें

आपसी सहमति तलाक़ से पहले पति-पत्नी द्वारा तय शर्तें।

दस्तावो में मुफ़्त बनाएँ

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अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।

काग़ज़ की शुरुआत

दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।

समझौते का स्मरण पत्र

यह समझौता पत्र आज दिनांक 12 अक्टूबर 2026 को अमरनगर में निम्नलिखित पक्षों के बीच लिखा व निष्पादित किया गया:-

अनिल वर्मा पुत्र श्री रमेश वर्मा, आयु लगभग 31 वर्ष, निवासी मकान नं. 204, सेक्टर 9, शांतिपुर, ज़िला शांतिपुर, हरियाणा (जिसे आगे "प्रथम पक्ष (पति)" कहा गया है, और इस शब्द में संदर्भ के विपरीत न होने पर उसके वारिस, क़ानूनी प्रतिनिधि व समनुदेशिती शामिल होंगे) प्रथम पक्ष।

तथा

नेहा वर्मा पत्नी श्री अनिल वर्मा, आयु लगभग 28 वर्ष, निवासी मकान नं. 204, सेक्टर 9, शांतिपुर, ज़िला शांतिपुर, हरियाणा (जिसे आगे "द्वितीय पक्ष (पत्नी)" कहा गया है, और इस शब्द में संदर्भ के विपरीत न होने पर उसके वारिस, क़ानूनी प्रतिनिधि व समनुदेशिती शामिल होंगे) द्वितीय पक्ष।

अब यह विलेख साक्षी है और दोनों पक्ष निम्नलिखित पर सहमत हैं:-

1.यह कि दोनों पक्षों ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13-बी के अंतर्गत आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने का निर्णय लिया है, और अपने सभी दावे इन शर्तों पर निपटाए हैं।

2.यह कि पति पत्नी को पूर्ण व अंतिम स्थायी गुज़ारे व भरण-पोषण के रूप में ₹6,00,000 (छह लाख रुपये मात्र) देगा, पहली मोशन पर ₹3,00,000 और दूसरी मोशन पर ₹3,00,000, डिमांड ड्राफ़्ट से। पत्नी का भूत, वर्तमान या भविष्य के भरण-पोषण का कोई और दावा नहीं होगा।

बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।

साथ क्या लाएँ

साथ लाने वाले काग़ज़

कहाँ जाना है

पति और पत्नी दोनों दो गवाहों के सामने, प्रायः वकील के चैंबर या मध्यस्थता केंद्र में, इस पर हस्ताक्षर करते हैं, और यह पहली मोशन के साथ पारिवारिक न्यायालय में दाख़िल होता है; अदालत इसे बयानों के साथ दर्ज करती है।

फ़ीस

कई अदालतें इसे सादे काग़ज़ पर मान लेती हैं; स्टाम्प पेपर चाहिए या नहीं, अपने वकील से पूछें। इसके तहत ज़मीन या मकान देने पर स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्री की ज़रूरत पड़ सकती है।

ध्यान दें

काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।

स्टाम्प पेपर

प्रायः पहली मोशन के साथ अदालत में दाख़िल होता है; कई अदालतें सादे काग़ज़ पर मान लेती हैं।