विवाह की शून्यता की याचिका: शून्य या शून्यकरणीय (धारा 11 व 12 हिंदू विवाह अधिनियम)
विवाह को शून्य घोषित (जीवित जीवनसाथी, निषिद्ध रिश्तेदारी, सपिंड) या शून्यकरणीय विवाह रद्द (नपुंसकता, मानसिक विकार, बल या धोखा, किसी और से गर्भ) करवाने की याचिका।
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काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय, अमरनगर
हिंदू विवाह अधिनियम याचिका नं. ______ सन् 2026
बनाम
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 11 के अंतर्गत विवाह की शून्यता की डिक्री हेतु याचिका
निवेदन है कि:-
1.यह कि याचिकाकर्ता और प्रतिवादी का विवाह दिनांक 22-02-2026 को शांतिपुर में हिंदू रीति-रिवाज़ों से संपन्न हुआ। दोनों पक्षों पर हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 लागू होता है।
2.यह कि इस विवाह से कोई संतान नहीं हुई।
3.यह कि विवाह के बाद पक्ष पति-पत्नी के रूप में साथ रहे, आख़िरी बार मकान नं. 18, सेक्टर 4, शांतिपुर में, और दिनांक 05-08-2026 से वे अलग रह रहे हैं।
4.यह कि यह विवाह अधिनियम की धारा 11 के अंतर्गत शून्य है, क्योंकि विवाह के समय प्रतिवादी का जीवनसाथी जीवित था, जो अधिनियम की धारा 5(i) के विरुद्ध है। तथ्य ये हैं: प्रतिवादी का विवाह दिनांक 08-02-2015 को अमरनगर में आशा रानी से हुआ था; वह विवाह भंग नहीं हुआ है, और जब प्रतिवादी ने याचिकाकर्ता से विवाह किया तब वह जीवित थी, जैसे अब भी है; प्रतिवादी ने यह बात याचिकाकर्ता और उसके परिवार से छिपाई, जिन्हें इसका पता दिनांक 05-08-2026 को चला, जब आशा रानी अपने विवाह की फ़ोटो लेकर उनके घर आई।
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- विवाह का सबूत: पंजीकरण हुआ हो तो विवाह प्रमाण पत्र, नहीं तो शादी का कार्ड और रस्मों की फ़ोटो
- आधार कार्ड या कोई अन्य फ़ोटो पहचान पत्र, मौजूदा पते के सबूत सहित (फ़ोटोकॉपी; दिखाने के लिए मूल)
- न्यायालय के नोटिस के लिए दूसरे जीवनसाथी का पूरा मौजूदा पता (और फ़ोन नंबर, यदि पता हो)
- आधार का सबूत: पहले से जीवित जीवनसाथी के लिए पिछले विवाह का प्रमाण पत्र, फ़ोटो या किसी पुराने मुक़दमे का आदेश; नपुंसकता या मानसिक विकार के लिए मेडिकल रिकॉर्ड; बल या धोखे के लिए वह सब जो दिखाए कि क्या छिपाया गया और आपको कब पता चला
- बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र, यदि बच्चे हों (फ़ोटोकॉपी)
- आपके बीच किसी पुराने या लंबित मुक़दमे की याचिकाओं और आदेशों की प्रतियाँ: भरण-पोषण, घरेलू हिंसा, एफ़आईआर या कोई अन्य याचिका
- पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो, आमतौर पर दो या तीन
कहाँ जाना है
वकील के माध्यम से उस ज़िले के पारिवारिक न्यायालय (न हो तो ज़िला न्यायाधीश) में दाख़िल होती है जहाँ विवाह हुआ, जहाँ दूसरा जीवनसाथी रहता है, जहाँ आप आख़िरी बार साथ रहे या, पत्नी के लिए, जहाँ वह अब रहती है। न्यायालय आमतौर पर पहले पक्षों को मध्यस्थता या काउंसलिंग के लिए भेजता है।
फ़ीस
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगते हैं; आज की राशि काउंटर पर पूछें। वकील की फ़ीस अलग है।
ध्यान दें
- बल या धोखा: बल समाप्त होने या धोखे का पता चलने के एक वर्ष के भीतर याचिका दें, और उसके बाद पति-पत्नी के रूप में साथ न रहें (धारा 12(2))। किसी और से गर्भ: विवाह के एक वर्ष के भीतर याचिका दें।
- शून्यता की डिक्री के बाद भी विवाह से हुए बच्चे वैध रहते हैं (धारा 16)।
- जीवनसाथी के जीवित रहते दूसरा विवाह करना अपराध भी हो सकता है; फ़ौजदारी शिकायत के बारे में अपने वकील से पूछें।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
इस याचिका या प्रार्थना पत्र पर कोर्ट फ़ीस राज्य के कोर्ट फ़ीस क़ानून से तय होती है; कोर्ट फ़ीस टिकट (या ई-कोर्ट फ़ीस की रसीद) और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।