विवाह की शून्यता की याचिका: शून्य या शून्यकरणीय (धारा 11 व 12 हिंदू विवाह अधिनियम)

विवाह को शून्य घोषित (जीवित जीवनसाथी, निषिद्ध रिश्तेदारी, सपिंड) या शून्यकरणीय विवाह रद्द (नपुंसकता, मानसिक विकार, बल या धोखा, किसी और से गर्भ) करवाने की याचिका।

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काग़ज़ की शुरुआत

दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।

न्यायालय श्रीमान प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय, अमरनगर

हिंदू विवाह अधिनियम याचिका नं. ______ सन् 2026

नेहा वर्मा पुत्री श्री सतपाल वर्मा, आयु लगभग 28 वर्ष, निवासी मकान नं. 204, सेक्टर 9, शांतिपुर, ज़िला शांतिपुर, हरियाणा
…याचिकाकर्ता

बनाम

रोहन कुमार पुत्र श्री ओम प्रकाश, आयु लगभग 37 वर्ष, निवासी मकान नं. 12, गली नं. 3, नानक नगर, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब
…प्रतिवादी

हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 11 के अंतर्गत विवाह की शून्यता की डिक्री हेतु याचिका

निवेदन है कि:-

1.यह कि याचिकाकर्ता और प्रतिवादी का विवाह दिनांक 22-02-2026 को शांतिपुर में हिंदू रीति-रिवाज़ों से संपन्न हुआ। दोनों पक्षों पर हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 लागू होता है।

2.यह कि इस विवाह से कोई संतान नहीं हुई।

3.यह कि विवाह के बाद पक्ष पति-पत्नी के रूप में साथ रहे, आख़िरी बार मकान नं. 18, सेक्टर 4, शांतिपुर में, और दिनांक 05-08-2026 से वे अलग रह रहे हैं।

4.यह कि यह विवाह अधिनियम की धारा 11 के अंतर्गत शून्य है, क्योंकि विवाह के समय प्रतिवादी का जीवनसाथी जीवित था, जो अधिनियम की धारा 5(i) के विरुद्ध है। तथ्य ये हैं: प्रतिवादी का विवाह दिनांक 08-02-2015 को अमरनगर में आशा रानी से हुआ था; वह विवाह भंग नहीं हुआ है, और जब प्रतिवादी ने याचिकाकर्ता से विवाह किया तब वह जीवित थी, जैसे अब भी है; प्रतिवादी ने यह बात याचिकाकर्ता और उसके परिवार से छिपाई, जिन्हें इसका पता दिनांक 05-08-2026 को चला, जब आशा रानी अपने विवाह की फ़ोटो लेकर उनके घर आई।

बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।

साथ क्या लाएँ

साथ लाने वाले काग़ज़

कहाँ जाना है

वकील के माध्यम से उस ज़िले के पारिवारिक न्यायालय (न हो तो ज़िला न्यायाधीश) में दाख़िल होती है जहाँ विवाह हुआ, जहाँ दूसरा जीवनसाथी रहता है, जहाँ आप आख़िरी बार साथ रहे या, पत्नी के लिए, जहाँ वह अब रहती है। न्यायालय आमतौर पर पहले पक्षों को मध्यस्थता या काउंसलिंग के लिए भेजता है।

फ़ीस

जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगते हैं; आज की राशि काउंटर पर पूछें। वकील की फ़ीस अलग है।

ध्यान दें

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स्टाम्प पेपर

इस याचिका या प्रार्थना पत्र पर कोर्ट फ़ीस राज्य के कोर्ट फ़ीस क़ानून से तय होती है; कोर्ट फ़ीस टिकट (या ई-कोर्ट फ़ीस की रसीद) और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।