बच्चे की संरक्षा या मुलाक़ात हेतु याचिका
माता-पिता द्वारा बच्चे की संरक्षा, या उससे मिलने का समय माँगना।
यह काग़ज़ भरने के लिए तैयार दस्तावो में खुलता है, इस कंप्यूटर पर या ऐप में। खाते की ज़रूरत नहीं।
आईफ़ोन और आईपैड: जल्द ही ऐप स्टोर पर · एंड्रॉइड: जल्द ही गूगल प्ले पर
अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।
काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय, शांतिपुर
बनाम
संरक्षक एवं प्रतिपाल्य अधिनियम, 1890 की धारा 25 के अंतर्गत नाबालिग़ बच्चे की मुलाक़ात के अधिकार हेतु याचिका
निवेदन है कि:-
1.यह कि याचिकाकर्ता व प्रतिवादी काव्या, जन्म तिथि 09-03-2022, के माता-पिता हैं।
2.यह कि नाबालिग़ दिनांक 01-06-2024 से प्रतिवादी की संरक्षा में है।
3.यह कि पिता को एक साल से अधिक से बच्ची से मिलने नहीं दिया गया, जिससे उसके साथ बच्ची का रिश्ता प्रभावित हो रहा है।
4.यह कि नाबालिग़ का कल्याण सर्वोपरि है, और माँगा गया आदेश उसी के हित में है।
प्रार्थना:
अतः श्रीमान जी से प्रार्थना है कि याचिकाकर्ता को नाबालिग़ से इस प्रकार मिलने दिया जाए: हर दूसरे रविवार सुबह 10 से शाम 5 बजे तक, और हफ़्ते में दो बार वीडियो कॉल, और तब तक अंतरिम आदेश पारित किए जाएँ।
न्याय के हित में अन्य कोई राहत जो माननीय न्यायालय उचित समझे, वह भी दी जाए।
दिनांक: 12-10-2026
द्वारा अधिवक्ता
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र और स्कूल का रिकॉर्ड
- आधार कार्ड या कोई अन्य फ़ोटो पहचान पत्र, मौजूदा पते के सबूत सहित (फ़ोटोकॉपी; दिखाने के लिए मूल)
- बच्चे की भलाई दिखाने वाला सबूत: आपकी आय और घर, पास का स्कूल, इलाज का रिकॉर्ड, या बच्चे को कोई नुक़सान
- अदालत के नोटिस के लिए बच्चे के दूसरे माता या पिता का पूरा मौजूदा पता (और फ़ोन नंबर, यदि पता हो)
- आपके बीच किसी पुराने या लंबित मुक़दमे की याचिकाओं और आदेशों की प्रतियाँ: भरण-पोषण, घरेलू हिंसा, एफ़आईआर या कोई अन्य याचिका
कहाँ जाना है
वकील के माध्यम से उस ज़िले के पारिवारिक न्यायालय (या गार्डियन जज) में दाख़िल होती है जहाँ बच्चा आमतौर पर रहता है; अपनी बात कह सकने लायक़ बच्चे से जज प्रायः बात करते हैं, और माता-पिता को मध्यस्थता के लिए भेज सकते हैं।
फ़ीस
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगते हैं; आज की राशि काउंटर पर पूछें। वकील की फ़ीस अलग है।
ध्यान दें
- संरक्षा का फ़ैसला बच्चे की भलाई से होता है, माता-पिता के हक़ से नहीं; पाँच साल से छोटे बच्चे के लिए क़ानून आमतौर पर माँ को प्राथमिकता देता है (धारा 6 हिंदू अप्राप्तवयता और संरक्षकता अधिनियम)।
- मुक़दमा चलते समय अंतरिम मुलाक़ात माँगें, और हर मुलाक़ात का ब्योरा लिखकर रखें।
- अगर तलाक़ या कोई अन्य वैवाहिक मुक़दमा चल रहा है, तो संरक्षा उसी में भी माँगी जा सकती है (धारा 26 हिंदू विवाह अधिनियम)।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।