नाबालिग़ की संपत्ति बेचने या गिरवी रखने की अनुमति (धारा 8(2) हिंदू अप्राप्तवयता और संरक्षकता अधिनियम)

नैसर्गिक संरक्षक ज़मीन या मकान में नाबालिग़ का हिस्सा बेचने, गिरवी रखने, तबादला करने या लंबे पट्टे पर देने हेतु न्यायालय की अनुमति माँगता है, ज़रूरत या लाभ और नाबालिग़ का पैसा रखने का तरीक़ा बताकर।

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काग़ज़ की शुरुआत

दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।

न्यायालय श्रीमान ज़िला न्यायाधीश, अमरनगर

संरक्षकता प्रार्थना पत्र नं. ______ सन् 2026

रोहन कुमार पुत्र श्री ओम प्रकाश, आयु लगभग 37 वर्ष, निवासी मकान नं. 12, गली नं. 3, नानक नगर, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब
…प्रार्थी

हिंदू अप्राप्तवयता और संरक्षकता अधिनियम, 1956 की धारा 8(2), सहपठित संरक्षक एवं प्रतिपाल्य अधिनियम, 1890 की धारा 29, के अंतर्गत नाबालिग़ों की अचल संपत्ति के संबंध में अनुमति हेतु प्रार्थना पत्र

निवेदन है कि:-

1.यह कि प्रार्थी निम्नलिखित नाबालिग़ों का पिता एवं नैसर्गिक संरक्षक है, जो प्रार्थी के साथ रहते हैं:

क्रमनाबालिग़ का नामजन्म तिथिसंपत्ति में हिस्सा
1अर्जुन14-03-2017एक-तिहाई
2रिया02-07-2020एक-तिहाई

2.यह कि ऊपर दिखाया गया हिस्सा निम्नलिखित अचल संपत्ति में नाबालिग़ों का है, जो उन्हें उनकी दादी कमला देवी द्वारा किए गए पंजीकृत दान पत्र नं. 876 दिनांक 10-06-2021 से मिला (आगे "उक्त संपत्ति"):

खेती की ज़मीन रक़बा 12 कनाल 0 मरला, खेवट नं. 45, खतौनी नं. 61, ख़सरा नं. 18//7 (8-0) व 18//8 (4-0), गाँव कल्याणपुर, हदबस्त नं. 112, तहसील व ज़िला अमरनगर, जैसा कि साल 2022-23 की जमाबंदी में दर्ज है।

3.यह कि हिंदू अप्राप्तवयता और संरक्षकता अधिनियम, 1956 की धारा 8(2) के अनुसार नैसर्गिक संरक्षक को नाबालिग़ की अचल संपत्ति का कोई भी भाग बेचने के लिए न्यायालय की पूर्व अनुमति ज़रूरी है, जो केवल आवश्यकता होने पर या नाबालिग़ के स्पष्ट लाभ के लिए दी जा सकती है (अधिनियम की धारा 8(4))।

बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।

साथ क्या लाएँ

साथ लाने वाले काग़ज़

कहाँ जाना है

वकील के माध्यम से उस ज़िले के ज़िला न्यायालय में दाख़िल होता है जहाँ संपत्ति है। फ़ैसले से पहले न्यायालय रिश्तेदारों और नाबालिग़ों को सुन सकता है।

फ़ीस

जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगते हैं; आज की राशि काउंटर पर पूछें। वकील की फ़ीस अलग है।

ध्यान दें

काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।

स्टाम्प पेपर

इस याचिका या प्रार्थना पत्र पर कोर्ट फ़ीस राज्य के कोर्ट फ़ीस क़ानून से तय होती है; कोर्ट फ़ीस टिकट (या ई-कोर्ट फ़ीस की रसीद) और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।