संरक्षकता याचिका (धारा 7 व 10)
नाबालिग़ का क़ानूनी संरक्षक बनना, प्रायः उसकी संपत्ति के हिस्से हेतु।
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काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान ज़िला न्यायाधीश, अमरनगर
संरक्षक एवं प्रतिपाल्य अधिनियम, 1890 की धारा 7 व 10 के अंतर्गत याचिका
निवेदन है कि:-
1.यह कि अर्जुन, जन्म तिथि 14-03-2017, हिंदू, सामान्यतः याचिकाकर्ता के साथ मकान नं. 12, गली नं. 3, नानक नगर, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब में रहता है; याचिकाकर्ता नाबालिग़ का माता है।
2.यह कि नाबालिग़ याचिकाकर्ता की देखरेख व संरक्षा में है, और किसी न्यायालय या वसीयत द्वारा नाबालिग़ का कोई संरक्षक नियुक्त या घोषित नहीं हुआ है।
3.यह कि संरक्षक की आवश्यकता है, क्योंकि नाबालिग़ के पिता रोहन कुमार विदेश में काम करते हैं और पारिवारिक मकान में नाबालिग़ के हिस्से का बँटवारा होना है।
4.यह कि नाबालिग़ इस संपत्ति का मालिक है: मकान नं. 12, नानक नगर, अमरनगर में एक-चौथाई हिस्सा, मूल्य लगभग ₹8,00,000।
5.यह कि नाबालिग़ के नज़दीकी रिश्तेदार हैं: ओम प्रकाश (दादा), नानक नगर, अमरनगर।
6.यह कि यह नियुक्ति नाबालिग़ के कल्याण में है, और याचिकाकर्ता का कोई हित नाबालिग़ के विरुद्ध नहीं है।
प्रार्थना:
अतः श्रीमान जी से प्रार्थना है कि याचिकाकर्ता को नाबालिग़ के शरीर व संपत्ति का संरक्षक नियुक्त किया जाए।
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- नाबालिग़ का जन्म प्रमाण पत्र और आधार (फ़ोटोकॉपी)
- आपका पहचान पत्र, और नाबालिग़ से आपके रिश्ते का सबूत (परिवार रजिस्टर, स्कूल रिकॉर्ड)
- गुज़र चुके माता या पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र, अगर हो
- नाबालिग़ की संपत्ति के काग़ज़, उसकी क़ीमत सहित: जमाबंदी (फ़र्द), इंतक़ाल, विलेख, या बैंक और एफ़डी का ब्योरा
- नाबालिग़ के नज़दीकी रिश्तेदारों के नाम और पते: उन्हें नोटिस जाता है
- आपकी और नाबालिग़ की दो-दो पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो
कहाँ जाना है
वकील के माध्यम से उस ज़िले के पारिवारिक न्यायालय, या ज़िला अदालत (गार्डियन जज), में दाख़िल होती है जहाँ नाबालिग़ आमतौर पर रहता है; फ़ैसले से पहले अदालत रिश्तेदारों और आम जनता को नोटिस देती है।
फ़ीस
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगते हैं; आज की राशि काउंटर पर पूछें। वकील की फ़ीस अलग है।
ध्यान दें
- अदालत से नियुक्त संरक्षक अदालत की अनुमति के बिना नाबालिग़ की ज़मीन न बेच सकता है, न गिरवी रख सकता है, न दे सकता है, न लंबे समय के लिए पट्टे पर दे सकता है (धारा 29)।
- अदालत ज़मानतियों सहित बॉन्ड और संपत्ति का सालाना हिसाब माँग सकती है।
- अगर माता या पिता को, प्राकृतिक संरक्षक के रूप में, केवल नाबालिग़ का हिस्सा बेचना है, तो "नाबालिग़ की संपत्ति बेचने या गिरवी रखने की अनुमति (धारा 8(2) हिंदू अप्राप्तवयता और संरक्षकता अधिनियम)" देखें।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।