उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (धारा 372)
मृतक के बैंक के पैसे, जमा व शेयर लेने हेतु अदालती प्रमाण पत्र।
यह काग़ज़ भरने के लिए तैयार दस्तावो में खुलता है, इस कंप्यूटर पर या ऐप में। खाते की ज़रूरत नहीं।
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अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।
काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान सिविल जज (सीनियर डिवीज़न), अमरनगर
भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 372 के अंतर्गत उत्तराधिकार प्रमाण पत्र हेतु याचिका
निवेदन है कि:-
1.यह कि जगीर सिंह की मृत्यु दिनांक 04-05-2026 को हुई, और मृत्यु के समय वे सामान्यतः इस न्यायालय के क्षेत्राधिकार में गाँव कल्याणपुर, तहसील अमरनगर में रहते थे।
2.यह कि मृतक ने कोई वसीयत नहीं की, और निम्नलिखित क़ानूनी वारिस हैं:
(क)बलवंत कौर (विधवा), याचिकाकर्ता
(ख)हरजीत सिंह (पुत्र), मॉडल टाउन, अमरनगर
3.यह कि याचिकाकर्ता मृतक के निम्नलिखित ऋणों व प्रतिभूतियों का हक़दार है, जिनके लिए यह प्रमाण पत्र माँगा गया है:
| क्रम | ऋण या प्रतिभूति | राशि |
|---|---|---|
| 1 | बचत खाता नं. 00000012345, अमर सहकारी बैंक | ₹1,12,450 |
| 2 | सावधि जमा नं. 7788, अमर सहकारी बैंक | ₹2,00,000 |
4.यह कि संपदा के संबंध में प्रोबेट, प्रशासन पत्र या उत्तराधिकार प्रमाण पत्र हेतु कोई अन्य आवेदन नहीं किया गया। अन्य क़ानूनी वारिसों को कोई आपत्ति नहीं है, और उन्हें व जनता को नोटिस जारी किया जा सकता है।
प्रार्थना:
अतः श्रीमान जी से प्रार्थना है कि उपरोक्त ऋणों व प्रतिभूतियों के संबंध में याचिकाकर्ता को उत्तराधिकार प्रमाण पत्र दिया जाए।
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र (फ़ोटोकॉपी; दिखाने के लिए मूल)
- मृतक के इस ज़िले में रहने का सबूत: मृतक के नाम का आधार, वोटर कार्ड या कोई बिल
- हर लेनदारी और प्रतिभूति (सिक्योरिटी) का ब्योरा: खाता और एफ़डी नंबर स्टेटमेंट सहित, शेयर या बॉन्ड, और हर एक की रक़म
- सभी क़ानूनी वारिसों के नाम, रिश्ते और पते, और सहमत हों तो उनके अनापत्ति शपथ पत्र
- आधार कार्ड या कोई अन्य फ़ोटो पहचान पत्र, मौजूदा पते के सबूत सहित (फ़ोटोकॉपी; दिखाने के लिए मूल)
कहाँ जाना है
वकील के माध्यम से उस ज़िले की ज़िला अदालत (या उसके सौंपे सिविल जज) में दाख़िल होती है जहाँ मृतक आमतौर पर रहता था; अदालत नोटिस छपवाती है, प्रायः अख़बार में, और प्रमाण पत्र देने से पहले हर आपत्ति सुनती है।
फ़ीस
राज्य के कोर्ट फ़ीस क़ानून के अनुसार लेनदारियों और प्रतिभूतियों की क़ीमत पर कोर्ट फ़ीस, जैसा काउंटर तय करे, और नोटिस के लिए अख़बार का ख़र्च। वकील की फ़ीस अलग है।
ध्यान दें
- उत्तराधिकार प्रमाण पत्र केवल रक़म और प्रतिभूतियों (बैंक जमा, शेयर, बकाया रक़म) के लिए है, ज़मीन या मकान के लिए नहीं: वे इंतक़ाल से, या वसीयत हो तो प्रोबेट से, जाते हैं।
- प्रमाण पत्र देने से पहले अदालत ज़मानती सहित सिक्योरिटी बॉन्ड माँग सकती है (धारा 375)।
- कई बैंक छोटा दावा बिना प्रमाण पत्र के निपटा देते हैं, हर बैंक की अपनी तय सीमा तक; पहले बैंक से पूछें।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।