आपसी सहमति से तलाक़, दूसरी मोशन (धारा 13-बी(2))
इंतज़ार की अवधि के बाद तलाक़ की डिक्री हेतु संयुक्त बयान।
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अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।
काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय, शांतिपुर
हिंदू विवाह अधिनियम याचिका नं. 88 सन् 2026
तथा
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13-बी(2) के अंतर्गत संयुक्त बयान / दूसरी मोशन
निवेदन है कि:-
1.यह कि इस न्यायालय ने दिनांक 10-04-2026 को पहली मोशन पर याचिकाकर्ताओं के बयान दर्ज किए।
2.यह कि तब से छह महीने से अधिक बीत चुके हैं, और याचिका वापस नहीं ली गई।
3.यह कि तब से याचिकाकर्ता साथ नहीं रहे, और मेल-मिलाप की कोई संभावना नहीं है। दोनों याचिकाकर्ता विवाह भंग करने हेतु अपनी स्वतंत्र सहमति दोहराते हैं।
4.यह कि समझौते पर अमल हो चुका है: पत्नी को डिमांड ड्राफ़्ट से ₹6,00,000 दिए जा चुके हैं।
प्रार्थना:
अतः श्रीमान जी से प्रार्थना है कि आपसी सहमति से तलाक़ की डिक्री पारित कर डिक्री की तारीख़ से याचिकाकर्ताओं का विवाह भंग किया जाए।
न्याय के हित में अन्य कोई राहत जो माननीय न्यायालय उचित समझे, वह भी दी जाए।
दिनांक: 12-10-2026
नेहा वर्मा (याचिकाकर्ता नं. 2)
द्वारा अधिवक्ता
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- याचिका का नंबर और पहली मोशन दर्ज होने की तारीख़ (अदालत माँगे तो उस आदेश की प्रति)
- समझौते पर अमल का सबूत: दी गई रक़मों के बैंक ट्रांसफ़र का रिकॉर्ड, रसीदें या ड्राफ़्ट, और लौटाए गए स्त्रीधन की हस्ताक्षर वाली सूची
- पति और पत्नी दोनों के आधार कार्ड या अन्य फ़ोटो पहचान पत्र, मौजूदा पते के सबूत सहित (फ़ोटोकॉपी; दिखाने के लिए मूल)
- छह महीने माफ़ करने वाला आदेश, अगर अदालत ने माफ़ किए
- बाक़ी रक़म के ड्राफ़्ट, जो इस चरण पर दी जानी है
कहाँ जाना है
उसी पारिवारिक न्यायालय में याचिका के नंबर के साथ संयुक्त रूप से दाख़िल होती है; दोनों हाज़िर होकर बयान देते हैं, और फिर अदालत डिक्री देने का फ़ैसला करती है।
फ़ीस
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगते हैं; आज की राशि काउंटर पर पूछें। वकील की फ़ीस अलग है।
ध्यान दें
- दूसरी मोशन याचिका दाख़िल होने के छह महीने से पहले नहीं और अठारह महीने के बाद नहीं होती, जब तक अदालत ने इंतज़ार माफ़ न किया हो।
- पति और पत्नी दोनों को अपने मूल पहचान पत्र लेकर ख़ुद आना होता है, ताकि जज के सामने उनके बयान दर्ज हों।
- डिक्री की प्रमाणित प्रति लें: रिकॉर्ड बदलवाने के लिए दफ़्तर इसे माँगते हैं, और दोबारा विवाह के लिए भी यह चाहिए।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।