जन्म या मृत्यु के विलंबित पंजीकरण के आदेश हेतु एसडीएम या डीएम को प्रार्थना पत्र
एक वर्ष बाद जन्म या मृत्यु केवल एसडीएम या डीएम के आदेश पर दर्ज होती है: शपथ पत्र सहित प्रार्थना पत्र।
यह काग़ज़ भरने के लिए तैयार दस्तावो में खुलता है, इस कंप्यूटर पर या ऐप में। खाते की ज़रूरत नहीं।
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अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।
काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
सेवा में,
उप-मंडल मजिस्ट्रेट,
अमरनगर
विषय: एक वर्ष के भीतर दर्ज न हुई मृत्यु के पंजीकरण हेतु आदेश बारे (धारा 13(3), जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969)
महोदय/महोदया,
1.यह कि करनैल सिंह पुत्र बचन सिंह की मृत्यु दिनांक 18-01-2024 को मॉडल टाउन, अमरनगर स्थित उनके घर में हुई। प्रार्थी मृतक का पुत्र है।
2.यह कि यह मृत्यु होने के एक वर्ष के भीतर जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार के पास दर्ज नहीं हुई, क्योंकि उनकी मृत्यु घर पर हुई और परिवार को पता नहीं था कि घर पर हुई मृत्यु की सूचना रजिस्ट्रार को देनी होती है।
3.यह कि जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार, नगर निगम, अमरनगर ने रिपोर्ट दी है कि यह मृत्यु रजिस्टर में दर्ज नहीं है (रिपोर्ट नं. NA-2026-0412 दिनांक 05-10-2026)। रिपोर्ट की प्रति संलग्न है।
4.यह कि जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) (2023 में संशोधित) के अनुसार होने के एक वर्ष के भीतर दर्ज न हुआ जन्म या मृत्यु केवल ज़िला मजिस्ट्रेट, उप-मंडल मजिस्ट्रेट या ज़िला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत अधिकारी के आदेश पर, उसकी सत्यता की जाँच के बाद और निर्धारित फ़ीस देने पर ही दर्ज हो सकता है।
5.यह कि प्रार्थी का शपथ पत्र और मृत्यु के उपलब्ध सबूत संलग्न हैं। प्रार्थी विलंब फ़ीस देने तथा जाँच के लिए ज़रूरी गवाह व रिकॉर्ड पेश करने को तैयार है।
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- शपथ पत्र: "जन्म के विलंबित पंजीकरण हेतु शपथ पत्र" या "मृत्यु के विलंबित पंजीकरण हेतु शपथ पत्र"
- रजिस्ट्रार की रिपोर्ट कि रजिस्टर में कोई इंदराज नहीं है (अनुपलब्धता प्रमाण पत्र)
- जन्म या मृत्यु का सबूत: अस्पताल या स्कूल का रिकॉर्ड, या घर पर मृत्यु हो तो श्मशान या क़ब्रिस्तान की रसीद
- आवेदक के, और जन्म के मामले में माता-पिता के, पहचान और पते के सबूत
- सरपंच, वार्ड पार्षद या तथ्य जानने वाले दो इज़्ज़तदार व्यक्तियों के बयान, अगर दफ़्तर माँगे
कहाँ जाना है
एसडीएम या ज़िला मजिस्ट्रेट (उपायुक्त) के दफ़्तर में, अक्सर सेवा केंद्र (पंजाब), सरल केंद्र (हरियाणा) या संपर्क केंद्र (चंडीगढ़) के ज़रिए। जाँच के बाद आदेश रजिस्ट्रार के पास जाता है, जो पंजीकरण करके प्रमाण पत्र जारी करता है।
फ़ीस
राज्य के जन्म-मृत्यु पंजीकरण नियमों के तहत विलंब फ़ीस, और सेवा केंद्र की फ़ीस यदि हो, दफ़्तर के कहे अनुसार दी जाती है; आज की राशि वहीं पूछें।
ध्यान दें
- आवेदन वहाँ करें जहाँ जन्म या मृत्यु हुई, वहाँ नहीं जहाँ परिवार अब रहता है।
- आदेश से पहले दफ़्तर तथ्यों की जाँच कर सकता है, गवाहों को सुन सकता है या सूचना छपवा सकता है; मूल काग़ज़ तैयार रखें।
- घटना के एक साल के भीतर इस आदेश की ज़रूरत नहीं: रजिस्ट्रार शपथ पत्र और विलंब फ़ीस पर, नियमों में ज़रूरी अनुमति के साथ, पंजीकरण कर देता है।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
सादा काग़ज़ काफ़ी है।