धोखेबाज़ ट्रैवल या इमिग्रेशन एजेंट के विरुद्ध शिकायत
विदेश के वीज़ा, दाख़िले या नौकरी के नाम पर पैसे लेने वाले एजेंट के विरुद्ध शिकायत: वादे, भुगतान की तालिका, क्या हुआ, और एफ़आईआर (या पंजाब में उपायुक्त द्वारा लाइसेंस पर कार्रवाई) का अनुरोध।
यह काग़ज़ भरने के लिए तैयार दस्तावो में खुलता है, इस कंप्यूटर पर या ऐप में। खाते की ज़रूरत नहीं।
आईफ़ोन और आईपैड: जल्द ही ऐप स्टोर पर · एंड्रॉइड: जल्द ही गूगल प्ले पर
अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।
काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
सेवा में,
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक,
अमरनगर
विषय: ट्रैवल एजेंट अनिल वर्मा (वर्मा ओवरसीज़ कंसल्टेंट्स) द्वारा धोखाधड़ी की शिकायत
महोदय/महोदया,
1.यह कि शिकायतकर्ता का लेन-देन अनिल वर्मा (वर्मा ओवरसीज़ कंसल्टेंट्स) से हुआ, जिसका दफ़्तर एससीओ 5, बस स्टैंड रोड, अमरनगर में है (आगे "एजेंट")। एजेंट विदेश के वीज़ा, दाख़िले और नौकरियाँ दिलवाने का काम करता है, और उसने शिकायतकर्ता को लाइसेंस या पंजीकरण नं. TP/AMR/0000/2024 दिखाया था।
2.यह कि दिनांक 10-02-2026 को एजेंट ने शिकायतकर्ता की पुत्री सिमरन कौर के लिए कनाडा के किसी कॉलेज या विश्वविद्यालय में दाख़िला और स्टडी वीज़ा दिलवाने का वादा किया। उसके वादे ये थे: तीन महीने में किसी कॉलेज में दाख़िला, पाँच महीने में स्टडी वीज़ा, और वीज़ा न मिलने पर पूरी राशि वापस।
3.यह कि इन वादों पर भरोसा करके शिकायतकर्ता ने एजेंट को कुल ₹6,50,000 (छह लाख पचास हज़ार रुपये मात्र) इस प्रकार दिए:
| क्र. | तारीख़ | राशि | कैसे दी | किसने ली |
|---|---|---|---|---|
| 1 | 12-02-2026 | ₹1,00,000 | नक़द, एजेंट के दफ़्तर में | अनिल वर्मा |
| 2 | 05-03-2026 | ₹2,50,000 | बैंक ट्रांसफ़र (आरटीजीएस), यूटीआर 000000000003 | वर्मा ओवरसीज़ कंसल्टेंट्स |
| 3 | 20-04-2026 | ₹3,00,000 | अमर सहकारी बैंक लि. का चेक नं. 000789 | अनिल वर्मा |
4.यह कि एजेंट ने दाख़िले का एक पत्र दिया, जिसके बारे में कॉलेज कहता है कि उसने कभी जारी नहीं किया; वीज़ा का कोई आवेदन दाख़िल नहीं हुआ, और अगस्त 2026 से दफ़्तर बंद है और एजेंट का फ़ोन बंद आ रहा है।
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- दी गई राशि की हर रसीद, बैंक ट्रांसफ़र पर्ची, यूपीआई स्क्रीनशॉट या चेक का रिकॉर्ड (फ़ोटोकॉपी; मूल संभालकर रखें)
- एजेंट ने जो कुछ दिया या भेजा: इक़रारनामा, विज़िटिंग कार्ड, ऑफ़र या दाख़िले के पत्र, वीज़ा के काग़ज़, और संदेशों के प्रिंट
- एजेंट का लाइसेंस या पंजीकरण नंबर, दफ़्तर का पता और फ़ोन नंबर, और दफ़्तर या बोर्ड की फ़ोटो, यदि आपके पास हों
- आपका आधार कार्ड या कोई अन्य फ़ोटो पहचान पत्र (फ़ोटोकॉपी; दिखाने के लिए मूल)
- यदि वीज़ा या नौकरी परिवार के किसी सदस्य के लिए थी, तो उसके पासपोर्ट की प्रति
- पहले की शिकायतों की प्रतियाँ और उनकी रसीदें
कहाँ जाना है
इसे एसएसपी, एसपी या पुलिस आयुक्त के दफ़्तर में जमा करें (या रजिस्टर्ड डाक से भेजें) और प्राप्ति या शिकायत नंबर लें। पंजाब में एक प्रति उपायुक्त को भी दी जा सकती है, जो ट्रैवल एजेंटों और इमिग्रेशन सलाहकारों को लाइसेंस देते हैं।
फ़ीस
पुलिस को शिकायत देने की कोई फ़ीस नहीं है।
ध्यान दें
- किसी एजेंट को पैसे देने से पहले उपायुक्त दफ़्तर (पंजाब) से लाइसेंस जाँचें और, विदेश में नौकरी के लिए, सरकार के ई-माइग्रेट पोर्टल पर भर्ती एजेंट का पंजीकरण देखें।
- मूल पासपोर्ट या प्रमाण पत्र कभी एजेंट के पास न छोड़ें; यदि एजेंट के पास हैं, तो शिकायत में उनकी सूची दें।
- एफ़आईआर दर्ज न हो तो वकील मजिस्ट्रेट से जाँच का आदेश दिलवाने का आवेदन कर सकते हैं (धारा 175(3) बीएनएसएस)। पैसे वापस लेने के लिए दीवानी दावा भी करना पड़ सकता है; वकील से पूछें।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
सादा काग़ज़ काफ़ी है।