सूचना का अधिकार आवेदन (धारा 6(1))
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत किसी सरकारी विभाग से सूचना माँगना।
यह काग़ज़ भरने के लिए तैयार दस्तावो में खुलता है, इस कंप्यूटर पर या ऐप में। खाते की ज़रूरत नहीं।
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अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।
काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6(1) के अंतर्गत आवेदन
सेवा में,
जन सूचना अधिकारी,
तहसीलदार कार्यालय, अमरनगर
विषय: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत सूचना हेतु अनुरोध
महोदय/महोदया,
कृपया मुझे निम्नलिखित सूचना उपलब्ध करवाई जाए:
1.मेरे दिनांक 12-08-2026 के इंतक़ाल आवेदन की मौजूदा स्थिति, और जिन अधिकारियों के पास यह लंबित है उनके नाम।
2.उस आवेदन पर लिखी टिप्पणियों की प्रमाणित प्रतियाँ।
मैं भारत का नागरिक हूँ। आवेदन शुल्क भारतीय पोस्टल ऑर्डर नं. 12A 345678 द्वारा जमा किया गया है। सूचना नीचे दिए पते पर भेजी जाए। यदि कोई सूचना किसी अन्य लोक प्राधिकरण के पास है, तो कृपया अधिनियम की धारा 6(3) के अंतर्गत यह आवेदन वहाँ भेजकर मुझे सूचित करें।
धन्यवाद सहित,
दिनांक: 12-10-2026
रोहन कुमार
मकान नं. 12, गली नं. 3, नानक नगर, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब
फ़ोन: 0000000004
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- आपके सवाल, हर बिंदु अलग, रिकॉर्ड माँगते हुए (प्रतियाँ, फ़ाइल नोटिंग, स्थिति), राय या कारण नहीं
- दफ़्तर जिस रूप में ले उस रूप में आवेदन शुल्क, या ग़रीबी रेखा से नीचे के व्यक्ति के लिए उसकी जगह बीपीएल कार्ड की प्रति
- उत्तर के लिए आपका पूरा डाक पता; पहचान पत्र या कारण की ज़रूरत नहीं
- आवेदन की एक प्रति, डाक रसीद या प्राप्ति मोहर के साथ रखने को
कहाँ जाना है
उस दफ़्तर के जन सूचना अधिकारी को भेजा जाता है जिसके पास सूचना है, डाक से या हाथों-हाथ (दफ़्तर रसीद देता है); केंद्रीय दफ़्तर इसे आरटीआई ऑनलाइन पोर्टल पर भी लेते हैं, और कुछ राज्यों का अपना पोर्टल है।
फ़ीस
आवेदन शुल्क केंद्र या राज्य के आरटीआई नियमों के अनुसार, जिसके अधीन दफ़्तर है; भारतीय पोस्टल ऑर्डर, डिमांड ड्राफ़्ट, रसीद लेकर नक़द, या जहाँ माना जाए वहाँ ऑनलाइन दिया जाता है; ग़रीबी रेखा से नीचे के व्यक्ति के लिए कोई शुल्क नहीं। प्रतियों का ख़र्च अलग है, जैसा नियम तय करें।
ध्यान दें
- जन सूचना अधिकारी को 30 दिन में उत्तर देना होता है (जीवन या स्वतंत्रता का सवाल हो तो 48 घंटे में); समय पर न दी गई सूचना मुफ़्त दी जाती है (धारा 7(6))।
- उत्तर न आए या अधूरा हो तो 30 दिन में अपील करें: "आरटीआई प्रथम अपील (धारा 19(1))" देखें।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
सादा काग़ज़ काफ़ी है।