जोड़े की सुरक्षा हेतु एसएसपी या पुलिस आयुक्त को अभ्यावेदन
पारिवारिक धमकियों से सुरक्षा हेतु जोड़े का ज़िला पुलिस प्रमुख को अनुरोध; आमतौर पर उच्च न्यायालय याचिका से पहले भेजा जाता है।
यह काग़ज़ भरने के लिए तैयार दस्तावो में खुलता है, इस कंप्यूटर पर या ऐप में। खाते की ज़रूरत नहीं।
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अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।
काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
सेवा में,
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक,
अमरनगर
विषय: हमारे जीवन व स्वतंत्रता की रक्षा: तुरंत कार्रवाई का अनुरोध
महोदय/महोदया,
1.यह कि हम, (1) हरमन सिंह पुत्र श्री जगतार सिंह, आयु लगभग 23 वर्ष, निवासी मकान नं. 17, गाँव कल्याणपुर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब और (2) सिमरन कौर पुत्री श्री गुरदेव सिंह, आयु लगभग 19 वर्ष, निवासी मकान नं. 17, गाँव कल्याणपुर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब, दोनों बालिग़ हैं। हरमन सिंह की जन्म तिथि 17-05-2003 और सिमरन कौर की जन्म तिथि 11-02-2007 है, जैसा कि हमारे आधार कार्ड और मैट्रिक के प्रमाण पत्र से स्पष्ट है।
2.यह कि हमने अपनी मर्ज़ी से दिनांक 05-10-2026 को गुरुद्वारा साहिब, गाँव कल्याणपुर, तहसील अमरनगर में आपस में विवाह किया; गुरुद्वारे का दिया विवाह प्रमाण पत्र और रस्मों की फ़ोटो हमारे पास हैं।
3.यह कि हमारे परिवार, विशेषकर सिमरन कौर के पिता गुरदेव सिंह और उनके भाई बलकार सिंह, हमारे रिश्ते के विरुद्ध हैं और हमें धमकियाँ दे रहे हैं: दिनांक 06-10-2026 को वे चार-पाँच अन्य लोगों के साथ गाँव कल्याणपुर में हमारे घर आए और कहा कि यदि सिमरन कौर घर वापस न आई तो हम दोनों को मार दिया जाएगा; तब से वे फ़ोन पर यही धमकी दोहरा रहे हैं।
4.यह कि हमें डर है कि किसी भी समय हमें नुक़सान पहुँचाया जा सकता है, और हमारे जीवन व स्वतंत्रता को ख़तरा है।
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- आप दोनों की आयु का प्रमाण: आधार, और मैट्रिक या जन्म प्रमाण पत्र (फ़ोटोकॉपी)
- विवाह प्रमाण पत्र और फ़ोटो, या साथ रहने का प्रमाण (किरायानामा, कोई साझा दस्तावेज़)
- आप दोनों की एक साथ ताज़ा फ़ोटो
- धमकियों का कोई प्रमाण: संदेश, कॉल रिकॉर्डिंग, पहले की शिकायतें
कहाँ जाना है
एसएसपी, एसपी या पुलिस आयुक्त के दफ़्तर में देकर रसीद लें, या रजिस्टर्ड डाक और ई-मेल से भेजें; एक प्रति अपने थाने के एसएचओ को भेजें।
फ़ीस
अभ्यावेदन की आमतौर पर कोई फ़ीस नहीं होती; केवल डाक ख़र्च।
ध्यान दें
- डाक रसीदें, ई-मेल और डायरी नंबर संभालकर रखें: उच्च न्यायालय की याचिका में इनकी ज़रूरत पड़ती है।
- आप दोनों इस पर हस्ताक्षर करें। तुरंत ख़तरा हो तो पहले 112 पर फ़ोन करें।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
सादा काग़ज़ काफ़ी है।