एफ़आईआर दर्ज न होने पर एसपी/एसएसपी को शिकायत (धारा 173(4))
थाना एफ़आईआर दर्ज न करे तो अगला क़दम।
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अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।
काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
सेवा में,
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक,
ज़िला अमरनगर
विषय: थाना सिटी अमरनगर द्वारा एफ़आईआर दर्ज न करना
महोदय/महोदया,
1.यह कि दिनांक 01-09-2026 को प्रार्थी ने एसएचओ, थाना सिटी अमरनगर को इस अपराध बारे लिखित शिकायत दी: कबीर शर्मा ने दिनांक 15-08-2026 को नौकरी का वादा कर मुझसे ₹2,00,000 लिए और न नौकरी दी न पैसे लौटाए।
2.यह कि शिकायत से संज्ञेय अपराध बनने के बावजूद एसएचओ ने अब तक एफ़आईआर दर्ज नहीं की।
3.यह कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 173(4) के अंतर्गत अनुरोध है कि आप स्वयं मामले की जाँच करें, या एफ़आईआर दर्ज करवाकर अपने अधीनस्थ अधिकारी को जाँच का निर्देश दें। पहली शिकायत की प्रति संलग्न है।
धन्यवाद सहित,
दिनांक: 12-10-2026
मीरा शर्मा
मकान नं. 7, बसंत विहार, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब
फ़ोन: 0000000003
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- थाना प्रभारी को दी गई आपकी शिकायत की प्रति, उसकी प्राप्ति मोहर, डीडीआर या शिकायत नंबर सहित
- उसके साथ दिए सबूतों की प्रतियाँ
- आधार कार्ड या कोई अन्य फ़ोटो पहचान पत्र (फ़ोटोकॉपी; दिखाने के लिए मूल)
- पिछली शिकायत डाक से भेजी थी तो डाक रसीद और ट्रैकिंग रिपोर्ट
कहाँ जाना है
लिखित रूप में रजिस्टर्ड डाक से भेजी जाती है, या ज़िले के एसएसपी या एसपी के दफ़्तर में दी जाती है (पुलिस कमिश्नरेट में पुलिस आयुक्त को); डाक रसीद या डायरी नंबर रखें।
फ़ीस
पुलिस को शिकायत देने की कोई फ़ीस नहीं है।
ध्यान दें
- एसपी भी कार्रवाई न करे तो वकील मजिस्ट्रेट को आवेदन दे सकते हैं: "एफ़आईआर दर्ज करवाने हेतु मजिस्ट्रेट को प्रार्थना पत्र (धारा 175(3) बीएनएसएस)" देखें।
- डाक रसीदें और ट्रैकिंग रिपोर्ट संभालकर रखें: मजिस्ट्रेट सबूत माँगेंगे कि आप पहले थाना प्रभारी और एसपी के पास गए थे।
- केवल वही लिखें जो आप ख़ुद जानते हैं, तारीख़ों और जगहों सहित: झूठी शिकायत या झूठा शपथ पत्र अपने-आप में अपराध है।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
सादा काग़ज़ काफ़ी है।