अदालत से बाहर समझौता विलेख (राज़ीनामा)
विवाद निजी तौर पर निपटाना, और यदि मुक़दमा लंबित हो तो उसे समाप्त करवाना।
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काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
समझौता विलेख (राज़ीनामा)
यह समझौता विलेख आज दिनांक 12 अक्टूबर 2026 को अमरनगर में निम्नलिखित पक्षों के बीच लिखा व निष्पादित किया गया:-
विक्रम सिंह पुत्र श्री हरबंस सिंह, आयु लगभग 52 वर्ष, निवासी मकान नं. 45, गुलाब कॉलोनी, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब (जिसे आगे "प्रथम पक्ष" कहा गया है, और इस शब्द में संदर्भ के विपरीत न होने पर उसके वारिस, क़ानूनी प्रतिनिधि व समनुदेशिती शामिल होंगे) प्रथम पक्ष।
तथा
कबीर शर्मा पुत्र श्री देव शर्मा, आयु लगभग 44 वर्ष, निवासी मकान नं. 7, बसंत विहार, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब (जिसे आगे "द्वितीय पक्ष" कहा गया है, और इस शब्द में संदर्भ के विपरीत न होने पर उसके वारिस, क़ानूनी प्रतिनिधि व समनुदेशिती शामिल होंगे) द्वितीय पक्ष।
अब यह विलेख साक्षी है और दोनों पक्ष निम्नलिखित पर सहमत हैं:-
1.यह कि दोनों पक्षों में विवाद पैदा हुआ: मकान नं. 45 और मकान नं. 47, गुलाब कॉलोनी के बीच की चारदीवारी बारे, जो सिविल जज (जूनियर डिवीज़न), अमरनगर की अदालत में दीवानी दावा नं. 412 सन् 2025 का विषय है।
2.यह कि मित्रों व रिश्तेदारों की मदद से दोनों पक्षों ने विवाद इन शर्तों पर निपटा लिया है:
(क)दीवार स्थानीय आयुक्त द्वारा चिह्नित रेखा पर रहेगी, और उसे दोबारा बनाने का ख़र्च बराबर बाँटा जाएगा
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- दोनों पक्षों के पहचान पत्र (फ़ोटोकॉपी; दिखाने के लिए मूल)
- विवाद के काग़ज़: नोटिस, शिकायतें, इक़रारनामे या बिल, और कोई मुक़दमा लंबित हो तो उसका नंबर, अदालत और अगली तारीख़
- समझौते के अंतर्गत दी गई किसी राशि का सबूत: बैंक ट्रांसफ़र का रिकॉर्ड, चेक या ड्राफ़्ट
- दो गवाह, अक्सर वे रिश्तेदार या मित्र जिन्होंने समझौता करवाया, हर एक अपने पहचान पत्र सहित
कहाँ जाना है
दोनों पक्ष दो गवाहों के सामने, प्रायः राज्य द्वारा इक़रारनामे के लिए तय मूल्य के ई-स्टाम्प पेपर पर, हस्ताक्षर करते हैं; नोटरी से तस्दीक़ वैकल्पिक है। मुक़दमा लंबित हो तो समझौता उसी अदालत में भी दाख़िल होता है, ताकि वह दर्ज हो (आदेश 23 नियम 3 सीपीसी)।
फ़ीस
ई-स्टाम्प शुल्क इक़रारनामों के लिए राज्य की अनुसूची के अनुसार लगता है; आज की राशि ई-स्टाम्प केंद्र से पूछें।
ध्यान दें
- लंबित मुक़दमे में दोनों पक्षों की हाज़िरी में समझौता दाख़िल करें ("संयुक्त समझौता बयान" देखें); अदालत उसे दर्ज करके मुक़दमा निपटाती है।
- समझौते से फ़ौजदारी मुक़दमा अपने-आप ख़त्म नहीं होता: केवल कुछ अपराधों में राज़ीनामा हो सकता है, बाक़ी के लिए अदालत या हाई कोर्ट का आदेश चाहिए।
- भुगतान बैंक ट्रांसफ़र या ड्राफ़्ट से करें और रसीद लें ("पूर्ण व अंतिम निपटारे की रसीद" देखें); ज़मीन या मकान का हस्तांतरण हो तो उसका अलग रजिस्टर्ड विलेख चाहिए।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
डीड और इकरारनामों पर स्टाम्प शुल्क राज्य, दस्तावेज़ और उसकी राशि पर निर्भर करता है; कुछ का सब-रजिस्ट्रार के यहाँ पंजीकरण ज़रूरी है। स्टाम्प पेपर पर छापने से पहले मौजूदा शुल्क और नियम जाँच लें।