अदम पैरवी में ख़ारिज मुक़दमे की बहाली हेतु प्रार्थना पत्र
किसी के उपस्थित न होने से ख़ारिज मुक़दमे को बहाल करवाना।
यह काग़ज़ भरने के लिए तैयार दस्तावो में खुलता है, इस कंप्यूटर पर या ऐप में। खाते की ज़रूरत नहीं।
आईफ़ोन और आईपैड: जल्द ही ऐप स्टोर पर · एंड्रॉइड: जल्द ही गूगल प्ले पर
अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।
काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
न्यायालय श्रीमान सिविल जज (जूनियर डिवीज़न), अमरनगर
दीवानी दावा नं. 412 सन् 2025
बनाम
आदेश 9 नियम 9 सपठित धारा 151 सीपीसी के अंतर्गत बहाली हेतु प्रार्थना पत्र
निवेदन है कि:-
1.यह कि उपरोक्त मुक़दमा दिनांक 01-10-2026 को अदम पैरवी में ख़ारिज हो गया, क्योंकि आवाज़ पड़ने पर न प्रार्थी उपस्थित था न अधिवक्ता।
2.यह कि अनुपस्थिति जानबूझकर नहीं थी: अधिवक्ता के मुंशी ने अगली तारीख़ ग़लती से 11-10-2026 लिख ली।
3.यह कि यह प्रार्थना पत्र आदेश के तीस दिन के भीतर दाख़िल है और गुण-दोष पर प्रार्थी का मामला मज़बूत है, जो बहाली न होने पर नष्ट हो जाएगा।
प्रार्थना:
अतः श्रीमान जी से प्रार्थना है कि दिनांक 01-10-2026 का आदेश रद्द करके मुक़दमा अपने मूल नंबर व स्टेज पर बहाल किया जाए।
न्याय के हित में अन्य कोई राहत जो माननीय न्यायालय उचित समझे, वह भी दी जाए।
दिनांक: 12-10-2026
द्वारा अधिवक्ता
सत्यापन
सत्यापित किया जाता है कि उपरोक्त प्रार्थना पत्र की बातें मेरी जानकारी व विश्वास के अनुसार सत्य हैं। आज दिनांक 12 अक्टूबर 2026 को अमरनगर में सत्यापित किया।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- मुक़दमा ख़ारिज करने वाले आदेश की प्रति, तारीख़ सहित
- कोई हाज़िर क्यों नहीं हुआ इसका सबूत, तारीख़ों सहित: इलाज के काग़ज़, परिवार में मृत्यु, सफ़र, या वकील का अपना कारण
- मुख्य मुक़दमा: उसका नंबर और साल, अदालत, पक्षों के नाम और अगली तारीख़
- समर्थन वाला शपथ पत्र: "वादपत्र या प्रार्थना पत्र के समर्थन में शपथ पत्र" देखें
कहाँ जाना है
आपके वकील के माध्यम से उसी अदालत में, जिसने मुक़दमा ख़ारिज किया, उसके पुराने नंबर के साथ दाख़िल होता है; दूसरे पक्ष को नोटिस जाता है और वह विरोध कर सकता है।
फ़ीस
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगते हैं; आज की राशि काउंटर पर पूछें। वकील की फ़ीस अलग है।
ध्यान दें
- ख़ारिज होने के 30 दिन के भीतर दाख़िल करें।
- अगर मियाद पहले ही निकल चुकी है, तो इसके साथ "विलंब माफ़ी हेतु प्रार्थना पत्र (धारा 5 परिसीमा अधिनियम)" दें और देरी दिन-ब-दिन समझाएँ।
- अदालत ख़र्चा (कॉस्ट) जमा करने की शर्त पर ही मुक़दमा बहाल कर सकती है; तय तारीख़ तक जमा करें, और उसके बाद हर तारीख़ पर हाज़िर रहें।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
जहाँ ज़रूरी हो, कोर्ट फ़ीस और वेलफ़ेयर टिकट अदालत के दफ़्तर के निर्देश अनुसार लगाएँ।