उधार इक़रारनामा
निजी उधार और उसकी वापसी का लिखित रिकॉर्ड।
यह काग़ज़ भरने के लिए तैयार दस्तावो में खुलता है, इस कंप्यूटर पर या ऐप में। खाते की ज़रूरत नहीं।
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अभी वकील ने नहीं जाँचा। हस्ताक्षर से पहले हर पंक्ति जाँचें।
काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
उधार इक़रारनामा
यह इक़रारनामा आज दिनांक 12 अक्टूबर 2026 को अमरनगर में निम्नलिखित पक्षों के बीच लिखा व निष्पादित किया गया:-
विक्रम सिंह पुत्र श्री हरबंस सिंह, आयु लगभग 52 वर्ष, निवासी मकान नं. 45, गुलाब कॉलोनी, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब (जिसे आगे "ऋणदाता" कहा गया है, और इस शब्द में संदर्भ के विपरीत न होने पर उसके वारिस, क़ानूनी प्रतिनिधि व समनुदेशिती शामिल होंगे) प्रथम पक्ष।
तथा
कबीर शर्मा पुत्र श्री देव शर्मा, आयु लगभग 44 वर्ष, निवासी मकान नं. 7, बसंत विहार, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब (जिसे आगे "ऋणी" कहा गया है, और इस शब्द में संदर्भ के विपरीत न होने पर उसके वारिस, क़ानूनी प्रतिनिधि व समनुदेशिती शामिल होंगे) द्वितीय पक्ष।
अब यह विलेख साक्षी है और दोनों पक्ष निम्नलिखित पर सहमत हैं:-
1.यह कि ऋणदाता ने आज ऋणी को बैंक ट्रांसफ़र द्वारा ₹3,00,000 (तीन लाख रुपये मात्र) उधार दिए हैं, जिनकी प्राप्ति ऋणी स्वीकार करता है।
2.यह कि ऋण पर 9 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज लगेगा।
3.यह कि ऋणी ऋण 01-12-2026 से ₹30,000 की 10 मासिक क़िस्तों में, बाक़ी पर ब्याज सहित लौटाएगा। ऋणी बिना किसी जुर्माने के पहले भी लौटा सकता है।
4.यह कि ज़मानत के रूप में ऋणी ने ऋणदाता को दो आगे की तारीख़ के चेक दिए हैं, जो पूरी वापसी पर लौटाए जाएँगे।
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- ऋणदाता और ऋणी के पहचान पत्र और पैन (फ़ोटोकॉपी; दिखाने के लिए मूल)
- राशि देने का सबूत: बैंक ट्रांसफ़र का रिकॉर्ड, या चेक या ड्राफ़्ट का नंबर और तारीख़
- वापसी की तय योजना (क़िस्तें, तारीख़ें और ब्याज), और ज़मानत में दिए गए आगे की तारीख़ के चेकों के नंबर, तारीख़ें और बैंक
- दो गवाह, हर एक अपने पहचान पत्र सहित
कहाँ जाना है
दोनों दो गवाहों के सामने, प्रायः राज्य द्वारा तय मूल्य के ई-स्टाम्प पेपर पर, हस्ताक्षर करते हैं; मूल प्रति ऋणदाता रखता है। इसकी रजिस्ट्री नहीं होती और नोटरी से तस्दीक़ वैकल्पिक है, लेकिन ज़मानत में दी गई ज़मीन या मकान के लिए अलग रजिस्टर्ड रहननामा चाहिए।
फ़ीस
ई-स्टाम्प शुल्क राज्य की अनुसूची के अनुसार लगता है (कुछ राज्य उधार इक़रारनामे पर राशि के हिसाब से शुल्क लेते हैं); आज की राशि ई-स्टाम्प केंद्र से पूछें। तस्दीक़ करवाएँ तो नोटरी की फ़ीस काउंटर पर दी जाती है।
ध्यान दें
- उधार देना और लौटाना बैंक ट्रांसफ़र या चेक से करें: आयकर क़ानून एक सीमा से ऊपर नक़द में क़र्ज़ लेने या लौटाने पर रोक लगाता है।
- हर वापसी की रसीद लें, या देखें कि वह बैंक रिकॉर्ड में दिखे।
- जो पैसा उधार देने का कारोबार करता है, उसे राज्य के साहूकारी (मनी-लेंडर्स) क़ानून के अंतर्गत लाइसेंस चाहिए हो सकता है; किसी मित्र को एक बार दिए उधार के लिए प्रायः नहीं।
- उधार न लौटे तो "उधार की वसूली का नोटिस" भेजें और ज़्यादा देर न करें: दावा करने का समय प्रायः तीन साल होता है।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
डीड और इकरारनामों पर स्टाम्प शुल्क राज्य, दस्तावेज़ और उसकी राशि पर निर्भर करता है; कुछ का सब-रजिस्ट्रार के यहाँ पंजीकरण ज़रूरी है। स्टाम्प पेपर पर छापने से पहले मौजूदा शुल्क और नियम जाँच लें।