नए साझेदार को शामिल करना
मौजूदा फ़र्म में नया साझेदार लाना।
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काग़ज़ की शुरुआत
दस्तावो के नमूना विवरण के साथ; लोग और जगहें काल्पनिक हैं। नीले शब्द वे हैं जो आप भरते हैं।
साझेदार शामिल करने का विलेख
यह विलेख आज दिनांक 12 अक्टूबर 2026 को अमरनगर में निम्नलिखित पक्षों के बीच लिखा व निष्पादित किया गया:-
कबीर शर्मा पुत्र श्री देव शर्मा, आयु लगभग 44 वर्ष, निवासी मकान नं. 7, बसंत विहार, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब (जिसे आगे "मौजूदा साझेदार" कहा गया है, और इस शब्द में संदर्भ के विपरीत न होने पर उसके वारिस, क़ानूनी प्रतिनिधि व समनुदेशिती शामिल होंगे) प्रथम पक्ष।
तथा
सिमरन कौर पुत्री श्री गुरदेव सिंह, आयु लगभग 19 वर्ष, निवासी मकान नं. 88, मॉडल टाउन, अमरनगर, तहसील व ज़िला अमरनगर, पंजाब (जिसे आगे "नया साझेदार" कहा गया है, और इस शब्द में संदर्भ के विपरीत न होने पर उसके वारिस, क़ानूनी प्रतिनिधि व समनुदेशिती शामिल होंगे) द्वितीय पक्ष।
अब यह विलेख साक्षी है और दोनों पक्ष निम्नलिखित पर सहमत हैं:-
1.यह कि मैसर्ज़ शर्मा ट्रेडर्ज़ दिनांक 01-04-2022 के साझेदारी विलेख के अंतर्गत कारोबार कर रही है, और मौजूदा साझेदार, रोहन कुमार सहित, दिनांक 01-11-2026 से नए साझेदार को शामिल करने पर सहमत हैं।
2.यह कि नया साझेदार ₹3,00,000 (तीन लाख रुपये मात्र) पूँजी लगाएगा, और उस तारीख़ से लाभ-हानि इस प्रकार बाँटी जाएगी: कबीर शर्मा 40%, रोहन कुमार 30% और सिमरन कौर 30%।
3.यह कि नया साझेदार अपने शामिल होने से पहले के फ़र्म के किसी कार्य या क़र्ज़ हेतु उत्तरदायी नहीं होगा।
बाक़ी काग़ज़ दस्तावो में है।
साथ क्या लाएँ
साथ लाने वाले काग़ज़
- साझेदारी विलेख और उसके बाद के बदलाव, और फ़र्म का पंजीकरण प्रमाण पत्र, पैन व जीएसटी पंजीकरण
- नए साझेदार के लिए: पैन, आधार या कोई अन्य पहचान पत्र, पते का प्रमाण और पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो
- नए साझेदार की पूँजी का सबूत: बैंक ट्रांसफ़र का रिकॉर्ड या चेक का विवरण
- हर मौजूदा साझेदार, हस्ताक्षर के लिए, पहचान पत्र सहित
- दो गवाह, हर एक अपने पहचान पत्र सहित
कहाँ जाना है
सभी मौजूदा साझेदार और नया साझेदार दो गवाहों के सामने, प्रायः राज्य द्वारा साझेदारी विलेख के लिए तय मूल्य के ई-स्टाम्प पेपर पर, हस्ताक्षर करते हैं; नोटरी से तस्दीक़ वैकल्पिक है। इसकी सब-रजिस्ट्रार के यहाँ रजिस्ट्री प्रायः नहीं होती।
फ़ीस
ई-स्टाम्प शुल्क साझेदारी विलेख के लिए राज्य की अनुसूची के अनुसार लगता है (फ़र्म में बदलाव पर प्रायः नए विलेख जितना शुल्क लगता है); ई-स्टाम्प केंद्र से पूछें। बदलाव दर्ज करने की फ़र्मों के रजिस्ट्रार की अपनी फ़ीस है।
ध्यान दें
- बदलाव की सूचना फ़र्मों के रजिस्ट्रार को दें (धारा 63 भारतीय साझेदारी अधिनियम), और बैंक खाता, जीएसटी पंजीकरण व आयकर रिकॉर्ड अद्यतन करवाएँ।
- नया साझेदार शामिल होने से पहले के फ़र्म के कार्यों के लिए उत्तरदायी नहीं होता (धारा 31(2)), पर बाद के क़र्ज़ों के लिए होता है; पहले हिसाब जाँच लें।
- नाबालिग पूरा साझेदार नहीं बन सकता: सभी साझेदारों की सहमति से उसे केवल फ़र्म के लाभों में शामिल किया जा सकता है (धारा 30)।
काग़ज़ और फ़ीस बदल सकते हैं। जाने से पहले दफ़्तर से पूछ लें। केवल जानकारी के लिए, अभी वकील ने नहीं जाँची।
स्टाम्प पेपर
डीड और इकरारनामों पर स्टाम्प शुल्क राज्य, दस्तावेज़ और उसकी राशि पर निर्भर करता है; कुछ का सब-रजिस्ट्रार के यहाँ पंजीकरण ज़रूरी है। स्टाम्प पेपर पर छापने से पहले मौजूदा शुल्क और नियम जाँच लें।